लाहौर षड्यंत्र केस

futuredइतिहास

जब तीन युवाओं ने इतिहास की दिशा बदल दी

23 मार्च 1931 की वह ऐतिहासिक शाम, जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते-हँसते फाँसी स्वीकार की। लाहौर षड्यंत्र केस, क्रांतिकारी आंदोलन और शहादत की प्रेरक गाथा पर विस्तृत आलेख।

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futuredछत्तीसगढ

भगतसिंह के प्रेरणास्रोत और गदर क्रांति के अग्रदूत

उन्हीं दिनों प्रथम विश्व युद्ध आरंभ हो गया। तब करतार सिंह भारत आ गये। जनवरी 1914 में समाचार पत्र ‘गदर’ का गुरुमुखी संस्करण आरंभ हुआ। लाला हरदयाल जी इसके संपादक और करतार सिंह उपसंपादक बने।

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futuredहमारे नायक

सेल्यूलर जेल में महावीर सिंह का अमर बलिदान और 1933 की भूख हड़ताल

मानसिक दृढ़ संकल्प की कि पुलिस की हजार प्रताड़नाओं के बाद भले प्राण चले जायें पर संकल्प टस से मस न हो। ऐसे ही संकल्पवान क्राँतिकारी थे महावीर सिंह राठौर। जिनसे क्राँतिकारियों का विवरण पूछने के लिये प्रताड़ित किया गया और तब उन्होंने क्राँतिकारियों को प्रताड़ित किये जाने के विरुद्ध अनशन किया फिर भी प्रताड़ना बंद न हुई

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