भारतीय दर्शन

futuredपुस्तक समीक्षा

संघ और प्रचारक जीवन को समझने की दृष्टि देता है ‘तत्वमसि’ उपन्यास – पुस्तक चर्चा

‘तत्वमसि’ उपन्यास के माध्यम से श्रीधर पराड़कर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रचारक जीवन के त्याग, अनुशासन, राष्ट्रसेवा एवं भारतीय दर्शन को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है।

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futuredइतिहास

भारतीय दर्शन की धारा में बुद्ध का योगदान : बुद्ध पूर्णिमा विशेष

वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध के जीवन, दर्शन और भारतीय चिंतन पर उनके गहरे प्रभाव को समझाता यह शोधपरक आलेख बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण के अद्भुत संयोग को रेखांकित करता है।

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futuredधर्म-अध्यात्म

भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जन हितकारी भयहारी : माता जानकी जयंती विशेष

माता सीता के जन्म, जीवन और धरती में समाने की प्रतीकात्मकता के माध्यम से भारतीय दर्शन में नारी और प्रकृति के अविभाज्य संबंध का गहन विवेचन।

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futuredहमारे नायक

स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना: आत्मगौरव से राष्ट्रनिर्माण तक

स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना पर केंद्रित यह आलेख बताता है कि आत्मगौरव, सेवा, वेदांत और युवाशक्ति के माध्यम से उन्होंने आधुनिक भारत की वैचारिक नींव कैसे रखी।

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futuredधर्म-अध्यात्म

स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण और भारत का गौरव

11 सितंबर 1893 को शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के “मेरे प्यारे भाइयो और बहनो” संबोधन ने विश्व को भारतीय दर्शन, सहिष्णुता और मानवता का संदेश दिया। यह क्षण हर भारतवासी के लिए गर्व का प्रतीक है।

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futuredछत्तीसगढ

आचार्य गोविन्द चन्द्र पाण्डेय: भारतीय परंपरा, दर्शन और संस्कृति के समर्पित शोध साधक

आचार्य गोविन्द चन्द्र पाण्डेय भारतीय दर्शन, संस्कृति और भाषा के समर्पित विद्वान थे, जिन्होंने अपने शोध, लेखन और अध्ययन से भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्परिभाषित किया।

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