यदि वन न रहें तो…वन से आत्मसंवाद
“यदि वन न रहें तो…” विषय पर यह भावनात्मक और तथ्यात्मक आलेख जंगल में चलते एक व्यक्ति के आत्मसंवाद के माध्यम से वन संरक्षण, जनसंख्या दबाव और भविष्य की चुनौतियों को प्रस्तुत करता है।
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Read More2013 की उत्तराखंड त्रासदी केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि चेतावनी थी—हिमालय की गोद में बसे जीवन के संतुलन की पुकार। कैलाश यात्रा के अनुभव से यह लेख न केवल श्रद्धांजलि है, बल्कि विकास बनाम विनाश की गूंजती चेतावनी भी है।
Read Moreछत्तीसगढ़ में भी बाघों के होने की जानकारी मिलती रहती है, जैसे कुछ महीनों पूर्व बार नवापारा के जंगलों में विचरते एक बाघ का वीडियो वायरल हुआ था। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में लगभग 19 बाघ हैं। यह संख्या गत वर्षों में थोड़ी कम हो गई है, जिसका मुख्य कारण बाघों के आवास में कमी और शिकार की घटनाएं हैं। यहाँ बाघों के आंकड़े घटते बढ़ते रहते हैं।
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