गुरुकुल कांगड़ी

futuredहमारे नायक

शुद्धि, शिक्षा और स्वदेशी के आर्य प्रहरी स्वामी श्रद्धानंद

23 दिसंबर 1926 को जब वे अस्वस्थ थे, अब्दुल रशीद नामक व्यक्ति ने उनके घर आकर गोली मार दी। यह घटना पूरे देश को झकझोर गई। वे शय्या पर थे, लेकिन उनके चेहरे पर भय नहीं था। उनकी हत्या ने उनके विचारों को समाप्त नहीं किया, बल्कि उन्हें और व्यापक बना दिया।

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एक राष्ट्रभक्त आर्य संन्यासी स्वामी श्रद्धानंद का बलिदान

आर्यसमाज के प्रखर वेदज्ञ वक्ता, उच्चकोटि के अधिवक्ता, ओजस्वी वक्ता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्राँतिकारियों की एक पूरी पीढ़ी तैयार

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