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महाराष्ट्र कैबिनेट ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक को दी मंजूरी, जबरन धर्म परिवर्तन पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान

महाराष्ट्र सरकार ने जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के उद्देश्य से प्रस्तावित ‘धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026’ के मसौदे को मंजूरी दे दी है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक को स्वीकृति दी गई, जिसमें अवैध या दबाव में कराए गए धर्म परिवर्तन पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है।

प्रस्तावित कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को अधिकतम सात वर्ष तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा इस कानून के अंतर्गत आने वाले अपराधों को गैर-जमानती रखने का प्रस्ताव है, जिससे पुलिस को जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में सीधे कार्रवाई करने का अधिकार मिलेगा।

राज्य के मंत्री नितेश राणे ने बताया कि यह विधेयक कथित तौर पर ‘लव जिहाद’ और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकने के लिए लाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद किसी भी महिला को जबरन विवाह या धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा।

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सूत्रों के अनुसार, सरकार इस विधेयक को मौजूदा बजट सत्र के दौरान राज्य विधानसभा में पेश कर सकती है। दोनों सदनों से पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून प्रभाव में आएगा।

सरकार का कहना है कि इस विधेयक का मसौदा तैयार करते समय संविधान के प्रावधानों, उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों और अन्य राज्यों में लागू समान कानूनों का अध्ययन किया गया है।

वहीं विपक्ष ने इस प्रस्तावित कानून को लेकर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के विधायक सचिन अहीर ने कहा कि इस विधेयक की मंशा और दायरा स्पष्ट होना चाहिए। उनके अनुसार यह देखना जरूरी है कि यह कानून सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होगा या किसी विशेष समुदाय को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

दरअसल, फरवरी 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों का अध्ययन करने के लिए एक सात सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसकी अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक को सौंपी गई थी। इस समिति को अन्य राज्यों में लागू कानूनों का अध्ययन कर राज्य के लिए उपयुक्त कानूनी ढांचा सुझाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

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समिति की रिपोर्ट और विभिन्न राज्यों के कानूनों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर यह मसौदा तैयार किया गया, जिसे 26 फरवरी को सरकार के सामने प्रस्तुत किया गया था और अब कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है।

इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले भी स्पष्ट किया था कि सरकार अंतरधार्मिक विवाह के खिलाफ नहीं है, लेकिन यदि किसी विवाह में दबाव, पहचान छिपाने, प्रलोभन या धोखाधड़ी के जरिए धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो ऐसे मामलों से सख्ती से निपटने के लिए कानून जरूरी है।

महाराष्ट्र के इस फैसले के साथ ही उन राज्यों की संख्या बढ़ गई है जहां जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून बनाए गए हैं या प्रस्तावित हैं। वहीं इस मुद्दे पर देश में कानूनी बहस भी जारी है और हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने कई राज्यों में लागू ऐसे कानूनों की वैधता की समीक्षा करने का फैसला किया है।