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futuredसाहित्य

छत्तीसगढ़ में पले बढ़े छत्तीस भाषाओं के महारथी

छत्तीसगढ़ की माटी में, रायपुर की धरती पर पले-बढ़े हरिनाथ डे भी दुनिया की उन्हीं भूली-बिसरी विलक्षण प्रतिभाओं में से थे। उनकी जीवन यात्रा सिर्फ 34 साल की रही, लेकिन जुनून की हद तक भाषाएँ सीखने की दीवानगी ने उन्हें विश्व के महानतम भाषाविदों की प्रथम पंक्ति में प्रतिष्ठित कर दिया। उन्होंने छत्तीस भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया।

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futuredसम्पादकीय

जैव विविधता संरक्षण में हाथियों की भूमिका और मानव-हाथी संघर्ष

हाथियों के हमलों में प्रतिवर्ष सैकड़ों लोगों की जान जा रही है और फ़सलों के साथ सम्पत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, इस कारण हाथी भी मनुष्य के द्वारा मारे जा रहे हैं। जबकि हाथी का होना जैव विविधता संरक्षण में उतना ही जरुरी है जितना किसी अन्य प्राणी का। इन घटनाओं से मनुष्य एवं हाथियों के बीच सहअस्तित्व खत्म हो रहा है।

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futuredपॉजिटिव स्टोरी

दुर्बल नहीं, सबल बनो – स्वामी विवेकानंद

शक्ति, शक्ति, शक्ति, यही वह है जिसकी हमें जीवन में सर्वाधिक आवश्यकता है। कमजोर के लिए यहाँ कोई जगह नहीं हैं, न इस जीवन, न ही किसी और जीवन में । दुर्बलता गुलामी की ओर ले जाती है । दुर्बलता हर प्रकार की दुर्गति की ओर ले जाती है- शारीरिक और मानसिक । शक्ति ही जीवन है और दुर्बलता मृत्यु

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futuredखबर राज्यों से

भारतीय ऋषी परंपरा और शिक्षा संस्कृति पुस्तक का लोकापर्ण एवं काव्य गोष्ठी

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शुभदा पांडेय और प्रा. दिनेश चंद्र शर्मा ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पण कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट शिक्षक ही श्रेष्ठ शिष्य के निर्माता होता हैं। हमारी प्राचीन शिक्षा रोजगार नहीं परोपकार से अपनी पाठशाला आरंभ करती थी।

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futuredधर्म-अध्यात्म

रामचरितमानस का नैतिक और सामाजिक प्रभाव

तुलसीदास की रचनाओं का भारतीय जनमानस पर व्यापक प्रभाव पड़ा। रामचरितमानस का भारतीय जनमानस पर अत्यधिक गहरा और व्यापक प्रभाव पड़ा है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह महाकाव्य न केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में पूजनीय है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, समाज और जीवन दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है।

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