साहित्य

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पंडित लोचन प्रसाद पाण्डेय : जिन्होंने 120 साल पहले लिखा था पहला छत्तीसगढ़ी नाटक

छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रथम नाटककार पंडित लोचन प्रसाद पाण्डेय का जीवन, साहित्यिक योगदान, इतिहास व पुरातत्व में उनकी भूमिका और छत्तीसगढ़ी साहित्य में उनका स्थान।

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नववर्ष 2026 और छत्तीसगढ़ की तीन विलक्षण विभूतियाँ

नववर्ष 2026 के पहले दिन साहित्यकार नारायण लाल परमार, संत कवि पवन दीवान और वरिष्ठ पत्रकार चन्दूलाल चन्द्राकर की जीवन-यात्रा को स्मरण करता विशेष आलेख।

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एक अमर स्वर स्वतंत्रता की धुन में : सुब्रमण्या भारती

महाकवि सुभ्रमण्या भारती: तमिल साहित्य के नवजागरणकर्ता, स्वतंत्रता सेनानी और स्त्री सशक्तिकरण के प्रणेता। उनकी राष्ट्रभक्ति कविताएँ आज भी प्रेरणा स्रोत हैं।

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‘छत्तीसगढ़ मित्र’ से राज्य में अंकुरित हुआ पत्रकारिता का पौधा आज विशाल वृक्ष

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता का इतिहास 125 वर्षों से अधिक पुराना है, जिसकी नींव वर्ष 1900 में पंडित माधवराव सप्रे द्वारा पेंड्रा से प्रकाशित ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ ने रखी। यह वही बीज था, जो आज एक विशाल पत्रकारिता-वृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है।

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देवताओं का प्रिय और प्रकृति की साधना मास मार्गशीर्ष

श्रीकृष्ण का वचन “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” केवल धार्मिक कथन नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय दर्शन है। जब हम इस भाव को जीवन में अपनाते हैं, तब हमारे भीतर करुणा, संतुलन और कृतज्ञता स्वतः जागृत होती है।

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जब बाबा ने मेरे कान उमेंठे

सन् 1968 में जांजगीर में आयोजित उस ऐतिहासिक काव्य गोष्ठी का संस्मरण, जब यायावर कवि बाबा नागार्जुन ने अपने सहज स्वभाव, स्पष्टवादिता और कालजयी कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था।

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