डॉक्टर अंकल
बात उस समय की है जब हम नागपुर आए थे। नई जगह, नए लोग और अलग भाषा। सबकुछ अलग सा
Read Moreबात उस समय की है जब हम नागपुर आए थे। नई जगह, नए लोग और अलग भाषा। सबकुछ अलग सा
Read Moreपांव के नीचे धरती जलती, सिर ऊपर आकाश,
जब जब आता है यह मौसम करने यहां प्रवास
“भाषा संस्कृति है और संस्कृति खेती है,जिसकी फसल साहित्य है। लेकिन साहित्य संदेश देता है, उपदेश नहीं।” ये शब्द प्रसिद्ध भाषाविद और विद्वान साहित्यकार डा.चित्तरंजन कर के हैं ,जो वे विगत दिनों तिल्दा-नेवरा में आयोजित समन्वय साहित्य परिवार छत्तीसगढ़ के 29 वें वार्षिक महोत्सव में मुख्य अभ्यागत की आसंदी से बोल रहे थे।
Read Moreछत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया। एमन सरल सुभाव के होथे उन मिलनसार होथे, बासी खाके खेत म अन्न उगाथे,अपन घर पहुना ल बासी खवाके प्रेम से बिदा करथे, खुदे उघरा रइथे , आने ल तन ढंके बर ओन्हा देथें। छलकपट कभू नइ जानै फेर सच कहे बर फुर बोलिक होथे , देस भक्ति के रूप म उन तिरंगा झंडा के गुणगान करथें
Read Moreसीतामढ़ी का महत्व रामायण की कथा के अनुसार सही ढंग से समझा जा सकता है। राजा जनक सीतामढ़ी के पुनौरा और उर्विजा कुंड क्षेत्र में अनावृष्टि को रोकने हेतु हल चलाने, कृषि कर्म का उद्घाटन करने आये थे। इसी-के दौरान सीता जी प्राप्त हुई। इसी क्षेत्र में हलेश्वर स्थान मंडल है, जहाँ कृषि कर्म के उपरान्त हल रखा गया था। सीता जी की स्मृति से ही जुड़ा एक स्थान पंथपाकड़ है, जहाँ पर विवाह उपरान्त आयोध्या जाते हुये सीता जी की डोली रखी गयी थी,
Read Moreभूले -बिसरे कवि स्वर्गीय मधु धान्धी की कविताएं, (जन्म दिवस 21 जून ) साहित्यिक प्रतिभाओं के मामले में छत्तीसगढ़ की धरती
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