डॉ. बलदेव साव का साहित्यिक प्रदेय : जयंती विशेष
डॉ . बलदेव साव, जिन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ी में बल्कि हिंदी और असमिया भाषा में भी अपनी लेखनी से अनेक प्रयास किए हैं, जो उनके भाषा प्रेमी होने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
Read Moreडॉ . बलदेव साव, जिन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ी में बल्कि हिंदी और असमिया भाषा में भी अपनी लेखनी से अनेक प्रयास किए हैं, जो उनके भाषा प्रेमी होने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
Read More27 मई डाँ. बलदेव जी की 82 वीं जयंती के अवसर पर कविता डा. बलदेव की कविता “अंधेरे में” की
Read Moreबुद्ध प्रसन्न होंगे ——
निर्मल सरोवरों में अधडूबे, हंसों की तैराहट पर, जिसमें खेलती हो मछलियां, निर्द्वंद, निर्विरोध, निर्विवाद, बुद्ध प्रसन्न होंगे –नदियों की निर्मलता से, उनके जर्जर, कर्कग्रस्त शरीर से मुक्त होने पर, जिन्हें हम केवल अपने स्वार्थ के लिए, साधते जा रहे हैं। बालुओं का होता शहरीकरण. ग अपहरण है नदियों का
बहुत सरल है राम समझना कठिन कथा सीता की। जिसने अपनी त्याग तपस्या किए सिद्ध गीता सी। चरित परम पावन
Read Moreनींव हूँ बुनियाद हूं
हां मैं ही विकास हूं।
बाग में उद्यान में
संसद के हर मुकाम में
श्रमित धरोहर हूँ।
हां मैं मजदूर हूं।
बात उस समय की है जब हम नागपुर आए थे। नई जगह, नए लोग और अलग भाषा। सबकुछ अलग सा
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