साहित्य-साधना के एकांत तपस्वी : शिवशंकर पटनायक
वरिष्ठ साहित्यकार शिवशंकर पटनायक, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के पिथौरा में रहकर हिन्दी गद्य साहित्य को समर्पित जीवन जिया, अब भी कलम से ही रचते हैं उपन्यास और कहानियाँ।
Read Moreवरिष्ठ साहित्यकार शिवशंकर पटनायक, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के पिथौरा में रहकर हिन्दी गद्य साहित्य को समर्पित जीवन जिया, अब भी कलम से ही रचते हैं उपन्यास और कहानियाँ।
Read Moreछत्तीसगढ़ के लोक साहित्य को संरक्षित करने वाले पंडित अमृतलाल दुबे ने ‘तुलसी के बिरवा जगाय’ जैसे अमूल्य संग्रह के माध्यम से आदिवासी लोकगीतों की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखा। जानिए उनके प्रेरक जीवन और साहित्यिक योगदान की कहानी।
Read Moreभिलाई स्थित साहित्यिक संस्था ‘अगासदिया’ ने प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर ‘स्मरण-प्रेमचंद’ कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें उनकी कहानियों के छत्तीसगढ़ी अनुवाद संग्रह पर चर्चा हुई और साहित्यिक प्रभावों पर विचार रखे गए।
Read Moreदुर्ग में डॉ. खूबचंद बघेल की 125वीं जयंती पर छत्तीसगढ़ भ्रातृ संघ व मनवा कूर्मि समाज द्वारा भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उनके विचारों, साहित्यिक योगदान व राज्य निर्माण आंदोलन पर चर्चा हुई।
Read Moreशुभदा जी की सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘महाकुंभ के माणिक मृगमन’ गंगा, महाकुंभ और आस्था के अद्भुत संगम की काव्यात्मक और संवेदनात्मक यात्रा है, जिसमें 28 कविताएं, 2 आलेख और छायाचित्रों के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभवों को संजोया गया है।
Read Moreभिलाई में साहू मित्र सभा द्वारा डॉ. दीनदयाल साहू के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह ‘कलंकपुर के कलंक’ का विमोचन हुआ, काव्य गोष्ठी और वृक्षारोपण भी सम्पन्न।
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