धर्म-अध्यात्म

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प्रकृति संरक्षण के वैदिक सूत्र और ओजोन परत रक्षण

वैदिक ऋषियों के श्लोकों में प्रकृति संरक्षण और ओजोन परत जैसी सुरक्षा अवधारणा का उल्लेख मिलता है। जानें कैसे प्राचीन वैदिक सूत्र आधुनिक पर्यावरण संतुलन से जुड़े हैं।

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सनातन धर्म/ज्ञान/संस्कृति/ग्रन्थ परम्परा में हिन्दु (हिन्दू) शब्द का प्रयोग और अवधारणा

प्रश्न उठता है कि आर्य, वैदिक और सनातनी शब्द शास्त्रसम्मत और परम्परा प्राप्त होने पर भी क्या हिन्दु या हिन्दू शब्द भी शास्त्रसम्मत और परम्पराप्राप्त है? अधिकांश बुद्धिजीवियों की धारणा तो यही है कि हिन्दू – नाम मुसलमानों का रक्खा हुआ है, जो कि चोर आदि हीनता का वाचक है।

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शिकागो संभाषण 11 सितंबर, भारतीय संज्ञा प्रज्ञा विज्ञा का परिचय

स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण और उनके विचार आज भी भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता के मार्गदर्शक हैं। यह आलेख बताता है कि कैसे उनके संदेश विश्व को प्रेरित करते हुए भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का मार्ग दिखाते हैं।

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स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण और भारत का गौरव

11 सितंबर 1893 को शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के “मेरे प्यारे भाइयो और बहनो” संबोधन ने विश्व को भारतीय दर्शन, सहिष्णुता और मानवता का संदेश दिया। यह क्षण हर भारतवासी के लिए गर्व का प्रतीक है।

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प्रकृति, पितृ एवं ऊर्जा का संगम : पितृमोक्ष अमावस्या

सर्व पितृमोक्ष अमावस्या शरद और हेमंत ऋतु संगम का पावन पर्व है। यह तिथि पूर्वजों के स्मरण, प्रकृति ऊर्जा से जुड़ाव और समाज जीवन को समृद्ध बनाने का संदेश देती है।

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पूर्वज स्मरण, कुटुम्ब महत्ता और प्रकृति समन्वय का पर्व : पितृपक्ष

पितृपक्ष पूर्वजों के स्मरण, कुटुम्बीय एकता और प्रकृति से समन्वय का पर्व है। श्राद्ध, तर्पण और पाँच ग्रास परंपरा के माध्यम से यह व्यक्ति, परिवार और समाज को आंतरिक शक्ति और जीवन मूल्य प्रदान करता है।

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