Author: News Editor

futuredहमारे नायक

गीतों की शब्द शक्ति से राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान जगाने वाले कवि

सैनिकों के बलिदान पर उनका गीत “ऐ मेरे वतन के लोगो, जरा आँख में भर लो पानी” की रचना की। जिस भाव से प्रदीप ने इस गीत की रचना की उसी भावना से लता जी ने गाया। इस गीत के बोल आज भी हृदय को छू जाते हैं। यह गीत देश भक्ति के गीतों में अग्रणी माना गया ।

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futuredपॉजिटिव स्टोरी

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत की आर्थिक समृद्धि की यात्रा

विश्व के कुछ देशों में सत्ता परिवर्तन के बाद आर्थिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हुए दिखाई दे रहे

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futuredताजा खबरेंविश्व वार्ता

स्मार्टफोन का युग खत्म होने की ओर

जकरबर्ग का मानना है कि स्मार्ट ग्लास तकनीक स्मार्टफोन के बाद का अगला बड़ा प्लेटफॉर्म साबित होगी। अगर यह बदलाव सफल रहा, तो यह न केवल हमारे काम करने के तरीके को बदलेगा, बल्कि तकनीकी विकास के एक नए युग की शुरुआत करेगा।

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futuredधर्म-अध्यात्म

तीर्थ श्रेष्ठ नर्मदा का आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व : नर्मदा जयंती विशेष

नर्मदा नदी को ‘जीवित नदी’ के रूप में पूजा जाता है और इसे मातृ रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। इस नदी के तट पर अनेक धार्मिक स्थल स्थित हैं, जैसे ओंकारेश्वर, महेश्वर, अमरकंटक, मांडू, और होशंगाबाद। ओंकारेश्वर में स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के धार्मिक महत्व को और भी बढ़ाता है।

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futuredलोक-संस्कृति

बन वसंत बरनत मन फूल्यौ : बसंत पंचमी विशेष

बसंत ऋतु कवियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। कालिदास से लेकर आधुनिक हिंदी कवियों तक, सभी ने अपने काव्य में इस ऋतु की छटा बिखेरी है। बसंत को प्रेम, सौंदर्य, उल्लास और नवजीवन का प्रतीक माना जाता है, जो काव्य और साहित्य को मधुरता प्रदान करता है। बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक ही नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। इसका संबंध ज्ञान, प्रेम, सौंदर्य और उल्लास से है। यह पर्व पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति की महानता को दर्शाता है।

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