Author: News Editor

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वनों का महत्व और संरक्षण की आवश्यकता : विश्व वानिकी दिवस

छत्तीसगढ़ में स्थित वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान अनेक दुर्लभ और संकटग्रस्त जीवों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं। इसके अलावा, यहाँ की नदियों और आर्द्रभूमियाँ (वेटलैंड्स) जल संसाधनों को संरक्षित करने और जैव विविधता को बनाए रखने में सहायक हैं।

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भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूती देने के लिए 54,000 करोड़ रुपये के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी

भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 54,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसमें भारतीय सेना के T-90 टैंकों के इंजन अपग्रेड, भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो, और वायुसेना के लिए AEWC सिस्टम शामिल हैं। इसके साथ ही रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देशों को भी मंजूरी दी गई है।

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X ने भारतीय सरकार के खिलाफ ‘अवैध कंटेंट सेंसरशिप’ और ‘साहयोग पोर्टल’ को चुनौती दी

एलोन मस्क की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने भारतीय सरकार के खिलाफ कर्नाटका उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) का दुरुपयोग करके अवैध कंटेंट सेंसरशिप प्रणाली बनाई है, जो सुप्रीम कोर्ट के 2015 के श्रेया सिंघल फैसले का उल्लंघन करती है।

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इज़राइल ने गाजा में जमीनी ऑपरेशनों का दायरा बढ़ाया, हवाई हमलों में सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे गए

इज़राइल ने गाजा में अपनी जमीनी कार्रवाइयों का विस्तार करते हुए हवाई हमलों में सैकड़ों फिलिस्तीनी नागरिकों की जान ले ली। इस दौरान हमाास के कई नेताओं को निशाना बनाया गया और फिलिस्तीनियों के उत्तरी गाजा में प्रवेश पर रोक लगा दी गई।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान: दो मुठभेड़ों में 22 नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर जिलों में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए बड़े ऑपरेशन में 22 नक्सली मारे गए। सुरक्षा बलों ने इन मुठभेड़ों में भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की। बीजापुर में हुई मुठभेड़ के दौरान एक पुलिस जवान शहीद हो गए। यह ऑपरेशन नक्सल गतिविधियों के खिलाफ राज्य में एक बड़ा प्रहार साबित हो रहा है।

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गौरैया के लुप्त होने से जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव

गौरैया की घटती संख्या के पीछे कई मानवीय और पर्यावरणीय कारण हैं। आधुनिक जीवनशैली और तकनीकी विकास ने इसके प्राकृतिक वास को नष्ट कर दिया है। शहरों में बड़ी संख्या में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हुआ, जिससे गौरैया के घोंसले बनाने के लिए उपयुक्त स्थान कम होते गए। पहले मकानों की दीवारों में बनी दरारों और छप्परों के कोनों में यह आसानी से घोंसले बना लेती थी, लेकिन आधुनिक कंक्रीट के घरों में इसकी यह सुविधा समाप्त हो गई।

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