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इतिहास के शिखर पर मोदी

आचार्य ललित मुनि

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 10 जून का दिन एक विशेष अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। यह केवल एक राजनीतिक उपलब्धि का दिन नहीं था, बल्कि उस जनविश्वास, संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रीय आकांक्षा का उत्सव है, जिसने एक साधारण परिवार में जन्मे व्यक्ति को देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद पर सबसे लंबे समय तक बनाए रखा।

10 जून 2026 को नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में कुल कार्यकाल (26 मई 2014 से लेकर अब तक लगातार) 4,399 दिनों का हो गया। इस दिन के साथ ही वह स्वतंत्र भारत में सीधे लोकसभा चुनाव जीतकर सबसे लंबे समय तक लगातार इस पद पर रहने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गये, इससे पहले, यह रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम था। वैसे नेहरु जी का कार्यकाल 6,130 दिनों का है परन्तु स्वतंत्रता के बाद 15 अगस्त 1947 – 15 अप्रैल 1952 तक अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री थे, इसके बाद चुनाव हुआ।

भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में अनेक प्रधानमंत्री आए, जिन्होंने अपने-अपने समय में देश को दिशा दी। किंतु इतिहास में कुछ अवसर ऐसे आते हैं जब कोई व्यक्ति केवल एक पदाधिकारी नहीं रह जाता, बल्कि एक युग का प्रतीक बन जाता है। नरेंद्र मोदी का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहना ऐसा ही एक अवसर है।

भारत की करोड़ों माताओं के लिए यह कहानी प्रेरणा का स्रोत है। एक ऐसे बालक की कहानी, जिसने अभावों के बीच जीवन की शुरुआत की, रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता का हाथ बंटाया, और फिर अपने परिश्रम, अनुशासन तथा राष्ट्रसेवा के संकल्प के बल पर देश का नेतृत्व संभाला।

यह यात्रा केवल नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जहाँ लोकतंत्र किसी व्यक्ति की पारिवारिक विरासत नहीं, बल्कि उसकी कर्मनिष्ठा और जनस्वीकृति को महत्व देता है। किसी भी नेता की सबसे बड़ी उपलब्धि पुरस्कार, पदक या रिकॉर्ड नहीं होते। उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि जनता के हृदय में प्राप्त स्थान होता है।

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2014, 2019 और 2024 में लगातार तीन बार देशवासियों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त किया। करोड़ों भारतीयों ने उनमें एक ऐसे नेतृत्व को देखा जो देश को नई दिशा देने का प्रयास कर रहा था। यही कारण है कि आज का यह कीर्तिमान केवल नरेंद्र मोदी का नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक विश्वास का भी है जिसे भारत की जनता ने बार-बार व्यक्त किया।

इतिहास केवल बड़े भाषणों से नहीं बनता। इतिहास तब बनता है जब किसी गांव की बेटी को घर में शौचालय मिलता है, जब किसी गरीब मां के चूल्हे से धुआँ कम होता है, जब किसी किसान के खाते में सीधे सहायता राशि पहुँचती है, जब किसी बीमार परिवार को इलाज के लिए जमीन नहीं बेचनी पड़ती।

डिजिटल इंडिया ने देश को तकनीकी रूप से जोड़ा, स्वच्छ भारत अभियान ने स्वाभिमान को नया अर्थ दिया, उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं के जीवन को आसान बनाया, आयुष्मान भारत ने गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिया और जनधन योजना ने वित्तीय समावेशन का नया अध्याय लिखा। इन योजनाओं के आंकड़े अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनसे कहीं अधिक महत्वपूर्ण वे करोड़ों चेहरे हैं जिनके जीवन में इनसे बदलाव आया।

एक समय था जब भारत को विश्व मंच पर केवल एक बड़ा बाजार माना जाता था। आज भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। चंद्रयान-3 की सफलता, जी-20 की अध्यक्षता, आत्मनिर्भर भारत का अभियान, रक्षा निर्यात में वृद्धि, डिजिटल भुगतान में विश्व नेतृत्व और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका ने देशवासियों के मन में एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है। यह आत्मविश्वास केवल सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक ऊर्जा का परिणाम है।

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लोकतंत्र में कोई भी नेता आलोचनाओं से परे नहीं होता। नरेंद्र मोदी भी नहीं हैं। उनके कार्यकाल में अनेक मुद्दों पर बहस हुई, विरोध हुए और मतभेद भी सामने आए। लेकिन लोकतंत्र की यही शक्ति है कि वह संवाद और विमर्श के माध्यम से आगे बढ़ता है। सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने का यह रिकॉर्ड इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त हुआ है। यह किसी सत्ता के बल पर नहीं, बल्कि चुनाव दर चुनाव जनता के समर्थन से संभव हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति ने विश्व मंच पर देश की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को आधार बनाते हुए भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान, खाड़ी देशों तथा वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित किए। कोरोना महामारी के दौरान “वैक्सीन मैत्री” अभियान के माध्यम से भारत ने मानवता की सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया, जबकि 2023 के जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल अध्यक्षता ने भारत की कूटनीतिक क्षमता को पूरी दुनिया के सामने स्थापित किया।

सुरक्षा की दृष्टि से भी भारत सुदृढ हुआ है, सेना को श्रेष्ठतम आयुधों से सुसज्जित किया जा रहा है। उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ती की जा रही है। दुश्मनों से आंख मिलाकर मुंह तोड़ जवाब दिया जा रहा है चाहे सर्जिकल स्ट्राइक हो या ऑपरेशन सिंदूर हो। चीन की सीमाओं पर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, ऊंचाई वाले स्थानों पर बड़े हवाई जहाजों के लिए हवाई पट्टियां बनाई जा रही है। कश्मीर से धारा 370 हटाना कोई मामूली काम नहीं था,  इतिहास के इस कलंक को धोया गया, इसके साथ हिन्दू आस्था के केन्द्र भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुअ। राष्ट्र को सुदृढ करने वाली अनेक उपलब्धियां इनके कार्यकाल की रही हैं।

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अफ्रीकी संघ को जी-20 की सदस्यता दिलाने, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक पहचान दिलाने तथा संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने से भारत आज विश्व की प्रमुख निर्णायक शक्तियों में गिना जाने लगा है। यही कारण है कि वर्तमान समय में भारत केवल एक बड़ा लोकतंत्र नहीं, बल्कि विश्व की आशाओं और नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

आज जब देश 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब “विकसित भारत” का सपना करोड़ों भारतीयों की आकांक्षा बन चुका है। आर्थिक प्रगति, आधुनिक आधारभूत संरचना, तकनीकी नवाचार, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक आत्मगौरव इसी लक्ष्य के आधार स्तंभ हैं।

यह यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। चुनौतियाँ अभी भी हैं। 140 करोड़ जनसंख्या के राष्ट्र को चलाना भी कोई मामूली बात नहीं है। अनेक सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक समस्याएँ अभी भी देश के सामने मौजूद हैं। किंतु यह भी सत्य है कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके आत्मविश्वास और संकल्प से निर्मित होता है।

10 जून केवल एक तारीख नहीं है। यह उस भावना का प्रतीक है कि भारत का लोकतंत्र जीवंत है, अवसर सबके लिए खुले हैं और जनविश्वास किसी भी व्यक्ति को इतिहास के शिखर तक पहुँचा सकता है। इतिहास के पन्नों में यह उपलब्धि एक रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगी, लेकिन जनमानस में यह उस विश्वास के रूप में याद की जाएगी जिसने एक साधारण व्यक्ति को असाधारण बना दिया।

नरेंद्र मोदी का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहना केवल एक राजनीतिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, सपनों और विश्वास की कहानी है। यह उस भारत की कहानी है जो निरंतर आगे बढ़ना चाहता है, जो अपनी विरासत पर गर्व करता है और जो भविष्य को लेकर आशावान है।