क्या बनेगी डबल इंजन की सरकार : किसका होगा बंगाल?

बंगाल की धरती आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है जहां से पीछे मुड़कर देखना असहनीय है और आगे बढ़ना अनिवार्य। पिछले 15 वर्षों से तृणमूल कांग्रेस के शासन में यह गौरवशाली भूमि, घोटालों, गुंडागर्दी, सिंडिकेट राज और अराजकता का पर्याय बनती चली गई। रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं से सिंचित यह भूमि आज उस दर्द को झेल रही है जो किसी सभ्य समाज के लिए कल्पना से परे है।
2026 का विधानसभा चुनाव बंगाल के लिए महज एक चुनाव नहीं है। यह एक निर्णय है, एक परीक्षा है जिसमें बंगाल की जनता यह तय करेगी कि वह जंगलराज के साथ रहना चाहती है या फिर विकास और सुशासन का नया अध्याय लिखना चाहती है। बंगाल की सड़कों पर जो बदलाव की आंधी उठी है, जो जनाक्रोश धधक रहा है, वह स्वतः यह संकेत दे रहा है कि इस बार बंगाल अपनी नियति बदलने के लिए तैयार है।
“बंगाल को सोनार बांग्ला बनाने का वादा किया गया था, लेकिन उसे भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बना दिया गया।” — अमित शाह, गृहमंत्री
जब किसी सरकार का मूल्यांकन होता है तो उसकी नीतियों के साथ साथ उसके आचरण का भी आकलन किया जाता है। तृणमूल कांग्रेस की सरकार पिछले डेढ़ दशक में एक के बाद एक घोटालों की कहानियां लिखती रही और जनता की गाढ़ी कमाई सत्ता के गलियारों में स्वाहा होती रही।
पश्चिम बंगाल का शिक्षक भर्ती घोटाला शायद आधुनिक भारत के इतिहास में शिक्षा क्षेत्र का सबसे बड़ा और शर्मनाक घोटाला है। 2016 से 2021 के बीच राज्य में 25,780 से अधिक शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। इन नियुक्तियों में भारी धांधली और भ्रष्टाचार हुआ। लगभग 23 से 24 लाख युवाओं ने आवेदन किया था, जिनके साथ इस घोटाले ने एक भयंकर विश्वासघात किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में इस पूरी भर्ती को ‘दूषित और कलंकित’ करार देते हुए 25,753 नियुक्तियां रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने साफ कहा कि यह भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार से इतनी सनी हुई थी कि इसे आंशिक रूप से सुधारना संभव ही नहीं था। इस घोटाले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया। उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से 21 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए, जो घोटाले की कमाई थी।
इस घोटाले की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि हजारों मेधावी और ईमानदार युवाओं की नौकरियां भी चली गईं, केवल इसलिए कि टीएमसी के नेताओं ने पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्त किया था। बंगाल के गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों को रोना पड़ा, जबकि पैसे देने वाले लोग पदों पर बैठे रहे।
यदि शिक्षक घोटाला मध्यम वर्ग के सपनों पर कुठाराघात था, तो राशन घोटाले ने गरीबों के मुंह का निवाला छीना। बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हुई इस लूट में तृणमूल के नेता और सरकारी अधिकारी मिलकर गरीबों का राशन काला बाजार में बेचते रहे। जो अनाज सरकार ने गरीबों के लिए आवंटित किया था, वह तृणमूल के सिंडिकेट के गोदामों से होते हुए बाजारों में बिक जाता था। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं था, यह एक ऐसा अपराध था जिसने लाखों गरीब परिवारों को भोजन के अधिकार से वंचित किया।
बंगाल की सीमाओं पर खुलेआम चलने वाली मवेशी तस्करी और कोयला चोरी ने राज्य की कानून व्यवस्था की पोल खोल दी। कोयला घोटाले में सीबीआई ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी से पूछताछ की। मंत्री मलय घटक के आवास सहित कोलकाता में पांच ठिकानों पर छापेमारी हुई।
गाय तस्करी का यह खेल न केवल आर्थिक अपराध था, बल्कि यह बंगाल की सीमाओं की सुरक्षा पर भी एक गंभीर सवाल था। बांग्लादेश के रास्ते चलने वाली इस तस्करी में स्थानीय प्रशासन और सत्ताधारी दल के नेताओं की संलिप्तता की रिपोर्टें बार बार सामने आईं।
प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी सरकार के विरुद्ध 2,742 करोड़ रुपये के घोटाले और 20 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन के गंभीर आरोप लगाए। ईडी ने यहां तक कहा कि उसके अधिकारियों को धमकाया गया, जांच प्रभावित की गई और उनके खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कराई गईं। यह न केवल भ्रष्टाचार था, बल्कि जांच एजेंसियों को सीधे रोकने का प्रयास था, जो एक संवैधानिक संकट का स्वरूप ले चुका था।
घोटाले अकेले नहीं आते। जहां घोटाले होते हैं, वहां उन्हें बचाने के लिए गुंडागर्दी भी पलती है। बंगाल में टीएमसी का शासन सत्ता के संरक्षण में पले बढ़े उन गुंडों का राज बन गया जो खुलेआम कानून को ठेंगा दिखाते थे।
संदेशखाली का नाम आते ही रूह कांप उठती है। उत्तर 24 परगना के इस इलाके में टीएमसी नेता शाहजहां शेख और उसके गुर्गों ने वर्षों तक आम महिलाओं पर जो अत्याचार किए, वे बंगाल की शर्म बन गए। महिलाओं के यौन उत्पीड़न, जमीन हड़पने और आतंक के वे किस्से जब सामने आए तो पूरे देश का मन चीत्कार कर उठा। इस मामले के गवाह भोला घोष के बेटे की संदिग्ध मृत्यु ने सवाल खड़ा किया कि क्या गवाहों को भी खत्म किया जा रहा है?
सच यह है कि संदेशखाली अकेला उदाहरण नहीं था। यह पूरे बंगाल में फैले टीएमसी के उस सिंडिकेट राज का प्रतीक था जिसमें स्थानीय दबंग, पुलिस और सत्ता मिलकर आम नागरिकों को दबाते थे।
अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में नाइट ड्यूटी पर तैनात एक युवा महिला डॉक्टर के साथ जो भयंकर अपराध हुआ, उसने पूरे देश को हिला दिया। बलात्कार और हत्या की यह जघन्य घटना न केवल एक अपराध थी, बल्कि यह उस तंत्र की विफलता थी जिसे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब सीबीआई को जांच सौंपने की बात उठी, तब रात में हजारों गुंडे अस्पताल पर टूट पड़े और अपराध स्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट कर दिए गए। एफआईआर दर्ज करने में देरी, अपराध स्थल को सील न करना और फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट होना इस बात का संकेत था कि सत्ता कहीं न कहीं सच्चाई को दबाना चाहती थी।
पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ने न्याय में बाधा डाली। उन्होंने ममता सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लेते हुए भाजपा के टिकट पर पानीहाटी से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। पीड़िता के पिता ने भी भाजपा का दामन थामा। यह एक परिवार की नहीं, पूरे बंगाल की पुकार थी।
“मेरी बेटी की आत्मा तभी शांत होगी जब बंगाल से तृणमूल का सफाया होगा और कमल खिलेगा।” — रत्ना देबनाथ, आरजी कर पीड़िता की मां
बंगाल में विपक्षी कार्यकर्ताओं और नेताओं पर होने वाली राजनीतिक हिंसा एक स्थायी समस्या बन चुकी है। भाजपा कार्यकर्ता संजय भौमिक की हत्या हो या 2021 के चुनाव के बाद विपक्षी कार्यकर्ताओं पर जो हमले हुए, वे सभी इस बात का प्रमाण हैं कि टीएमसी के राज में बंगाल में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। 2026 के पहले चरण के मतदान के दौरान भी भाजपा नेताओं और उम्मीदवारों पर हमलों की खबरें आईं।
जब अत्याचार हद से गुजर जाता है तो जनता स्वयं उठ खड़ी होती है। आज बंगाल में वही हो रहा है। गांव गांव में, शहर शहर में एक ऐसी लहर उठ रही है जो तृणमूल के सुनामी को पलटने की ताकत रखती है।
23 अप्रैल 2026 को बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर रिकॉर्ड मतदान हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे जनता का स्पष्ट संदेश बताया कि बंगाल परिवर्तन चाहता है। भीषण गर्मी के बावजूद मतदान केंद्रों पर लंबी लंबी लाइनें एक ऐसे मतदाता की तस्वीर पेश कर रही थीं जो अब चुप नहीं रहना चाहता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में जो जनसैलाब उमड़ा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभाओं में भीषण गर्मी के बावजूद ‘योगी योगी’ के नारों से गूंजती भीड़ ने यह बता दिया कि बंगाल की जनता में बदलाव की ललक अपने चरम पर है। नबद्वीप हो या बागदा, पुरुलिया हो या उत्तर 24 परगना, हर कहीं भाजपा के प्रति जन उत्साह देखा गया।
भाजपा ने अपनी ‘जनगणर चार्जशीट’ के माध्यम से 40 पन्नों में टीएमसी के 15 वर्षों के कुशासन का पूरा कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखा। शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन घोटाला, मवेशी तस्करी, कोयला घोटाला और हर गांव हर मोहल्ले में फैले सिंडिकेट राज की यह दास्तान पढ़कर आम मतदाता की आंखें खुल गईं। यह चार्जशीट एक दस्तावेज नहीं बल्कि उन लाखों पीड़ितों की आवाज बनी जो अब तक चुप थे।
भाजपा का डबल इंजन सरकार का विचार केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है। यह एक व्यावहारिक सोच है जो यह मानती है कि जब राज्य और केंद्र में एक ही दल की सरकार हो, तो विकास की गति दोगुनी हो जाती है।
योगी आदित्यनाथ ने बंगाल की जनता के सामने उत्तर प्रदेश का उदाहरण रखा। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति भी कम बुरी नहीं थी। माफियाराज, दंगे, कर्फ्यू और अराजकता वहां भी थी। डबल इंजन सरकार के आने के बाद जो बदलाव आया, वह उत्तर प्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ बन गया। आज यूपी देश में सर्वाधिक एक्सप्रेसवे वाला राज्य है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन गया। काशी नई दिव्यता के साथ खड़ी है। माफियाओं की हड्डी पसली बुलडोजर ने कुचल दी। यह उदाहरण बंगाल के सामने एक आईना है।
यदि बंगाल में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनती है तो केंद्र और राज्य के बीच जो वर्षों से चला आ रहा टकराव समाप्त होगा। केंद्रीय योजनाओं का पूरा लाभ सीधे जनता तक पहुंचेगा। आवास योजना, उज्जवला योजना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं बिना राजनीतिक भेदभाव के लागू होंगी।
सिंडिकेट राज समाप्त होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन तृणमूल गुंडों को कानून के सामने झुकना होगा जो अब तक सत्ता की छत्रछाया में मनमानी करते रहे। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उद्योग वापस आएंगे। युवाओं का पलायन रुकेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल की महिलाओं से वादा किया कि 4 मई को सरकार बनने के बाद हर अन्याय और हर अत्याचार की फाइल खुलेगी। यह मोदी की गारंटी है। आरजी कर की पीड़िता से लेकर संदेशखाली की बहनों तक, हर अत्याचार का हिसाब होगा।
“टीएमसी के डर से आजादी, भ्रष्टाचार से आजादी, सिंडिकेट से आजादी, बेटियों पर अत्याचार से आजादी। यह मोदी की गारंटी है।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
बंगाल के इस चुनाव में महिला सुरक्षा का मुद्दा सबसे केंद्रीय प्रश्न बनकर उभरा है। आरजी कर कांड के बाद लाखों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग की। ममता बनर्जी का वह बयान कि ‘रात को बाहर मत निकलो’ बंगाल की महिलाओं को स्वीकार नहीं था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह एक महिला विरोधी सोच है।
भाजपा ने महिला नेतृत्व वाले विकास मॉडल का वादा किया है। संदेशखाली की पीड़ित बहनों को नेतृत्व का अवसर देना और आरजी कर पीड़िता की मां को उम्मीदवार बनाना यह बताता है कि भाजपा पीड़ितों के साथ खड़ी है। बंगाल की नारीशक्ति आज इतिहास का एक नया अध्याय लिखने को तैयार है।
बंगाल की भूगोलिक स्थिति इसे एक अत्यंत संवेदनशील सीमांत राज्य बनाती है। बांग्लादेश से लगती लंबी सीमा पर वर्षों से अवैध घुसपैठ होती रही है। टीएमसी पर आरोप है कि वोट बैंक की राजनीति के लिए उसने इन घुसपैठियों को संरक्षण दिया जो न केवल बंगाल के युवाओं का रोजगार छीन रहे हैं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं।
अमित शाह ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद वहां घुसपैठ रुकी। बंगाल में भी डबल इंजन सरकार बनने पर घुसपैठ पर कड़ाई से अंकुश लगाया जाएगा।
15 वर्षों के तृणमूल शासन ने बंगाल को एक ऐसे दलदल में धकेल दिया है जहां से निकलने का एकमात्र रास्ता परिवर्तन है। शिक्षक भर्ती घोटाले में 26,000 नौकरियों का रद्द होना, राशन घोटाले में गरीबों के अनाज की लूट, आरजी कर का वह भयावह कांड जिसने पूरे देश को झकझोरा, संदेशखाली में महिलाओं पर हुए अत्याचार, और हर गांव में फैला सिंडिकेट राज, यह सब मिलकर एक ऐसा चित्र बनाते हैं जो किसी भी जागरूक मतदाता को सोचने पर मजबूर कर देता है।
बंगाल की जनता गुंडों और अपराधियों से त्रस्त है। वह उस शासन से मुक्ति चाहती है जिसने स्कूल से लेकर अस्पताल तक, राशन की दुकान से लेकर कोयले की खदान तक सब कुछ भ्रष्टाचार की आग में झोंक दिया। पहले चरण का रिकॉर्ड मतदान, भाजपा की रैलियों में उमड़ती भीड़, आरजी कर पीड़िता के परिवार का भाजपा से जुड़ना, यह सब संकेत देते हैं कि बंगाल में बदलाव की लहर वास्तविक है। 4 मई का दिन बंगाल के इतिहास में एक निर्णायक पृष्ठ जोड़ेगा।
“बंगाल में डबल इंजन सरकार आएगी। टीएमसी के गुंडों को छिपने की जगह नहीं मिलेगी।” — योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
