छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी को 50 लाख की सम्मान राशि, कबड्डी में ऐतिहासिक उपलब्धि पर सरकार ने किया सम्मानित
भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की खिलाड़ी संजू देवी को राज्य शासन ने 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया है। यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार है जब किसी खिलाड़ी को इतनी बड़ी राशि प्रदान की गई है।
उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित समारोह में संजू देवी को चेक सौंपा। इस अवसर पर बिलासपुर के चिंगराजपारा कबड्डी क्लब को कबड्डी मैट भी प्रदान किया गया।
विश्वकप में शानदार प्रदर्शन
संजू देवी ने पिछले वर्ष बांग्लादेश में आयोजित कबड्डी विश्वकप में अपने बेहतरीन खेल से सभी का ध्यान खींचा था। उन्हें पूरे टूर्नामेंट का मोस्ट वेल्युबल प्लेयर चुना गया था। फाइनल मुकाबले में भारत के कुल 35 अंकों में से 16 अंक अकेले संजू ने दिलाए थे। सेमीफाइनल समेत अन्य मुकाबलों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा।
एशियन चैंपियनशिप में भी दिलाया स्वर्ण
विश्वकप से पहले मार्च 2025 में ईरान में आयोजित एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में भी संजू ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। वहां भी उन्होंने दमदार खेल दिखाते हुए भारत को चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया।
छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार से आने वाली 23 वर्षीय संजू एक श्रमिक परिवार से हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया। संजू वर्तमान में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बिलासपुर की बहतराई आवासीय बालिका कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं।
अरुण साव ने की तारीफ
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। संजू देवी ने अपने प्रदर्शन से न केवल देश को दो अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक दिलाए हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ का मान-सम्मान भी बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है, खासकर बेटियों को बेहतर अवसर और प्रोत्साहन देना जरूरी है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं संजू
संजू देवी की सफलता प्रदेश के युवाओं और खेल में करियर बनाने का सपना देखने वाले बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। उनका संघर्ष, मेहनत, अनुशासन और मानसिक मजबूती यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

