futuredखबर राज्यों सेताजा खबरें

सुरों की मलिका आशा भोंसले का निधन, 92 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

भारतीय संगीत जगत को गहरा आघात पहुंचा है। हिंदी फिल्म संगीत की दिग्गज गायिका आशा भोंसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके बेटे ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

आठ दशकों से भी लंबे करियर में 12,000 से अधिक गीत गाने वाली आशा भोसले ने बॉलीवुड संगीत को नई पहचान दी। उनकी आवाज ने परदे पर कई अभिनेत्रियों को जीवंत बना दिया और उनकी गायकी पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में गूंजती रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह “भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाज़ों में से एक थीं” और उनका योगदान देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता रहेगा। वहीं अभिनेत्री और राजनेता Hema Malini ने उन्हें याद करते हुए कहा कि “उनकी आवाज़ ने मेरे कई गीतों को अमर बना दिया।”

यह भी पढ़ें  श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास में छत्तीसगढ़ की नई पहचान, सरकार की योजनाओं से दिख रहे ठोस परिणाम

संगीतकार शंकर मधेवन ने भी भावुक होते हुए कहा कि “आज हर भारतीय का दिल टूटा है, लेकिन उनकी आवाज़ हमेशा जीवित रहेगी।”

बहुमुखी प्रतिभा की धनी

आशा भोसले की गायकी की सबसे बड़ी खासियत उनकी विविधता थी। रोमांटिक गीतों से लेकर तेज़-तर्रार डांस नंबर तक, उन्होंने हर शैली में अपनी छाप छोड़ी। “दम मारो दम”, “पिया तू अब तो आजा” और “मेहंदी है रचने वाली” जैसे गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं।

उन्होंने “तीसरी मंज़िल”, “कारवां”, “यादों की बारात”, “इजाज़त” और “सागर” जैसी फिल्मों में यादगार गीत गाए। फिल्म “उमराव जान” में उनकी गायकी को उनके करियर के शिखर के रूप में देखा जाता है।

लता मंगेशकर से अलग पहचान

आशा भोसले ने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर से अलग एक खास पहचान बनाई। जहां लता जी को शास्त्रीय और मधुर गायकी के लिए जाना जाता था, वहीं आशा भोसले ने अपनी ऊर्जावान और प्रयोगधर्मी शैली से संगीत में नई दिशा दी।

यह भी पढ़ें  आयुर्वेद में निवारक चिकित्सा की अवधारणा

आर.डी. बर्मन के साथ ऐतिहासिक साझेदारी

संगीतकार आर.डी बरमन के साथ उनकी जोड़ी बॉलीवुड की सबसे सफल जोड़ियों में गिनी जाती है। दोनों ने मिलकर कई यादगार गीत दिए और संगीत को आधुनिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में दोनों ने विवाह भी किया।

संघर्षों से भरी निजी जिंदगी

कम उम्र में शादी और फिर अलगाव के बाद आशा भोसले ने एकल माँ के रूप में अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाई और लगातार आगे बढ़ती रहीं।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और नई पीढ़ी से जुड़ाव

आशा भोसले ने अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ भी काम किया, जिनमें बॉय जॉर्ज शामिल हैं। 1997 में उनका सम्मान करते हुए ब्रिटिश बैंड कॉर्नरशॉप ने “Brimful of Asha” गीत जारी किया, जो दुनियाभर में लोकप्रिय हुआ।

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी वह सक्रिय रहीं। उन्होंने ऑनलाइन शो और यूट्यूब के जरिए नई पीढ़ी से जुड़ाव बनाए रखा।

यह भी पढ़ें  इस्लामाबाद वार्ता से पहले ही हालात बिगड़े, हॉर्मुज़ विवाद बना बड़ी चुनौती

अंत तक संगीत से जुड़ी रहीं

हाल ही में उन्होंने वर्चुअल बैंड गोरिलाज़ के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम किया, जो उनके करियर का अंतिम अध्याय माना जा रहा है।

आशा भोसले का निधन भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग के अंत का संकेत है। उनकी आवाज़ और उनके गीत हमेशा श्रोताओं के दिलों में जीवित रहेंगे।