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वैश्विक तनाव के बीच भारत-रूस रिश्तों को नई गति, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर खास जोर

बदलते वैश्विक परिदृश्य और पश्चिमी एशिया में जारी अस्थिरता के बीच भारत और रूस के संबंधों में और मजबूती देखने को मिल रही है। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

बैठकों के दौरान दोनों देशों ने दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में लिए गए फैसलों की प्रगति की समीक्षा भी की और सहयोग के नए क्षेत्रों पर विचार किया।

ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस

चर्चा में ऊर्जा सुरक्षा सबसे प्रमुख मुद्दा रही। रूस ने भारत को भरोसा दिलाया कि वह कच्चे तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में रूस का यह आश्वासन भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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उर्वरक आपूर्ति से कृषि को सहारा

रूस ने भारत को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति जारी रखने का भी आश्वासन दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की कृषि व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगा।

वैश्विक हालात पर साझा दृष्टिकोण

बैठक में पश्चिमी एशिया की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की बात कही।

रक्षा सहयोग को मिलेगी रफ्तार

अपनी यात्रा के दौरान मंटुरोव ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की। इस दौरान S-400 एयर डिफेंस सिस्टम सहित रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा हुई।

व्यापार और कनेक्टिविटी में नए अवसर

भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने, भारत से निर्यात बढ़ाने और टेक्नोलॉजी व खनिज जैसे नए क्षेत्रों में साझेदारी शामिल है।

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साथ ही इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को जल्द सक्रिय करने पर भी चर्चा हुई। इन परियोजनाओं के शुरू होने से व्यापार की लागत और समय दोनों में कमी आने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, रूस के उप प्रधानमंत्री की यह यात्रा संकेत देती है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-रूस संबंध अधिक रणनीतिक और बहुआयामी होते जा रहे हैं, जो आने वाले समय में ऊर्जा, रक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में और गहराई हासिल कर सकते हैं।