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क्या माता-पिता की मौत के बाद तलाक लेने पर बेटी को मिल सकती है फैमिली पेंशन? त्रिपुरा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि जिस बेटी को अपने पिता (पेंशनधारी) की मृत्यु के बाद तलाक मिलता है, वह राज्य की संशोधित पेंशन नियमावली के तहत पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं होगी। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों को समान वर्ग के लोगों के बीच भेदभाव नहीं माना जा सकता।

यह निर्णय न्यायमूर्ति एस दत्ता पुरकायस्थ की पीठ ने 1 अप्रैल को सुनाया। मामला एक ऐसी महिला की याचिका से जुड़ा था, जो अपने पति से अलग रह रही थी, लेकिन पिता की मृत्यु के समय उसका औपचारिक तलाक नहीं हुआ था।

क्या था मामला

याचिकाकर्ता अगरतला नगर निगम के एक पूर्व कर्मचारी की बेटी है। उसके पिता वर्ष 2004 में सेवानिवृत्त हुए थे और 2 दिसंबर 2018 को उनका निधन हो गया। महिला का दावा था कि शादी के कुछ समय बाद ही पति ने उसे छोड़ दिया था और वह करीब 40 वर्षों तक अपने पिता पर निर्भर रहकर उनके साथ रहती रही।

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हालांकि, उसे परिवार न्यायालय से तलाक का आदेश 4 अक्टूबर 2021 को मिला, यानी पिता की मृत्यु के लगभग तीन साल बाद। इसके बाद उसने अगरतला नगर निगम के माध्यम से पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया, जिसे 2024 में खारिज कर दिया गया।

अदालत ने क्या कहा

अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन का अधिकार पेंशनधारी की मृत्यु की तारीख से तय होता है। इसलिए लाभ पाने के लिए संबंधित व्यक्ति को उसी समय सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है।

त्रिपुरा राज्य सिविल सेवा (संशोधित पेंशन) नियम, 2017 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि नियमों के अनुसार “तलाकशुदा बेटी” को ही पेंशन का लाभ मिल सकता है, बशर्ते वह माता-पिता की मृत्यु के समय इस श्रेणी में आती हो।

न्यायालय ने यह भी कहा कि अदालत नियमों की व्याख्या को इतना विस्तारित नहीं कर सकती कि वह नए अधिकार बना दे। यदि नियमों को चुनौती नहीं दी गई है, तो उनके दायरे से बाहर जाकर राहत देना संभव नहीं है।

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अदालत का निष्कर्ष

अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता पिता पर निर्भर थी, लेकिन चूंकि पिता की मृत्यु के समय वह कानूनी रूप से तलाकशुदा नहीं थी, इसलिए वह पेंशन के लिए पात्र नहीं बनती। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।

यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जहां पारिवारिक पेंशन के लिए पात्रता का निर्धारण समय और कानूनी स्थिति के आधार पर किया जाएगा।