नक्सल प्रभावित लखापाल में विकास की धार: हर घर पहुंचा शुद्ध पेयजल, बदली गांव की तस्वीर
कभी नक्सल भय और पेयजल संकट से जूझने वाला सुकमा जिले का दूरस्थ गांव लखापाल अब विकास की नई मिसाल बनकर उभरा है। जहां पहले ग्रामीणों को पानी के लिए लंबी जद्दोजहद करनी पड़ती थी, वहीं आज हर घर में नल से स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। यह बदलाव केंद्र की जल जीवन मिशन और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन की सक्रियता से कोंटा विकासखंड के इस नक्सल प्रभावित गांव में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। जिला मुख्यालय से करीब 88 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव के 117 परिवार पहले बोरिंग, कुओं और एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जल संकट इतना गहरा जाता था कि लोगों को दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था, जिससे समय और श्रम के साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते थे।
योजना से बदली तस्वीर
जल जीवन मिशन के तहत करीब 72 लाख रुपये की लागत से गांव में चार सोलर पंप आधारित टंकियां स्थापित की गईं। इसके साथ ही सभी 117 घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। लगभग 465 की आबादी वाले इस गांव में अब नियमित रूप से स्वच्छ पानी की आपूर्ति हो रही है।
महिलाओं को सबसे बड़ी राहत
गांव की महिलाओं के लिए यह बदलाव किसी राहत से कम नहीं है। पहले जहां उन्हें रोज़ाना पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, अब घर पर ही पानी उपलब्ध होने से उनकी दिनचर्या आसान हो गई है। साथ ही, जलजनित बीमारियों में भी कमी देखी जा रही है।
डर से विकास की ओर
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, लखापाल पहले नक्सल प्रभाव के कारण भय के माहौल में जीता था। बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ-साथ सुरक्षा भी बड़ी चिंता थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। गांव में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी सुविधाएं पहुंचने से लोगों का जीवन स्तर सुधरा है और विकास की गतिविधियां तेज हुई हैं।
आजीविका के नए अवसर
पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों ने सब्जी उत्पादन की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। गांव में अब टमाटर, मिर्च, सेमी और अन्य सब्जियों की खेती की जा रही है, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है और खर्च में भी कमी आई है।
प्रशासन का लक्ष्य
जिला प्रशासन का कहना है कि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना प्राथमिकता है। जल जीवन मिशन के माध्यम से ऐसे गांवों में न केवल पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
नई पहचान बना लखापाल
आज लखापाल गांव विकास, आत्मनिर्भरता और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन गया है। यह उदाहरण दर्शाता है कि योजनाओं के सही क्रियान्वयन से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी बदलाव संभव है।

