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नवजीवन की ओर बढ़ते कदम: सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं को मिली आत्मनिर्भरता की राह

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रही है। इसी कड़ी में सुकमा जिले में आत्मसमर्पण कर चुके युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।

जिला मुख्यालय सुकमा के लाइवलीहुड कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 32 पुनर्वासित युवाओं को मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर अमित कुमार के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ, जहां उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए उन्हें आगे बढ़ने और अपने भविष्य को संवारने के लिए प्रेरित किया।

कलेक्टर ने अपने संबोधन में कहा कि पुनर्वास का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को स्थायी रोजगार, आत्मनिर्भरता और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना है। उन्होंने कहा कि मेसन किट सिर्फ औजारों का एक सेट नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक है, जो युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर प्रदान करेगा।

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उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और राजमिस्त्री का कार्य एक ऐसा कौशल है, जिसके जरिए युवा न केवल रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।

इस पहल के जरिए प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि पुनर्वास का अर्थ केवल मुख्यधारा में लौटना नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन को नई दिशा देना है। मेसन किट मिलने से इन युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में सक्षम हो सकेंगे।

सुकमा में शुरू हुई यह पहल न केवल नक्सल प्रभावित युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है, बल्कि समाज में एक नई उम्मीद भी जगा रही है।