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आंगनबाड़ी में ‘न्योता भोज’ बना जनआंदोलन, हजारों आयोजनों से लाखों बच्चों को पोषण

प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों में शुरू किया गया ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम अब पोषण, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता को जोड़ने वाला एक प्रभावी अभियान बनता जा रहा है। राज्य सरकार की पहल पर शुरू हुए इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की बढ़ती भागीदारी इसके सफल क्रियान्वयन की ओर संकेत कर रही है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से फरवरी 2026 के बीच पूरे प्रदेश में 9,763 ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों के माध्यम से 1.83 लाख से अधिक बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया, जो इस पहल के व्यापक असर को दर्शाता है।

जिलावार प्रदर्शन की बात करें तो बिलासपुर जिले में सबसे अधिक 884 आयोजन हुए, जिनसे 18 हजार से ज्यादा बच्चों को लाभ मिला। इसके अलावा कोरबा, रायगढ़ और कांकेर जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम आयोजित कर हजारों बच्चों तक पोषण पहुंचाया गया। वहीं धमतरी, महासमुंद और जांजगीर-चांपा जिलों में भी इस पहल को अच्छा प्रतिसाद मिला है।

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इस कार्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें आम नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और अभिभावक अपने निजी अवसरों—जैसे जन्मदिन या वर्षगांठ—पर आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के साथ भोजन साझा करते हैं। इससे न केवल बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार मिलता है, बल्कि समाज में उनके प्रति अपनापन और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से होते हैं। ऐसे में ‘न्योता भोज’ जैसे प्रयास उनके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

यह पहल कुपोषण को कम करने की दिशा में सहायक साबित हो रही है, साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का रुझान भी बढ़ा है। सरकार ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने विशेष अवसरों को इन बच्चों के साथ साझा कर इस जनकल्याणकारी अभियान को और मजबूत बनाएं।