साहित्यकार बसंत राघव को बिलासा साहित्य सम्मान
बिलासपुर, 15 मार्च।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और कला को सहेजने वाले बिलासा महोत्सव का 36वां आयोजन भव्य और सांस्कृतिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। पिछले तीन दशकों से अधिक समय से यह महोत्सव कलाकारों, साहित्यकारों और समाजसेवियों के लिए एक प्रतिष्ठित मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
समापन समारोह में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए साहित्यकार बसंत साव को बिलासा साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही लोकगायिका मंजू श्रीवास (रायपुर) को बिलासा कला सम्मान तथा चंचल सलूजा (अध्यक्ष, स्वयंसिद्धा फाउंडेशन, बिलासपुर) और धनंजय सिंह (ग्राम सेलर) को बिलासा सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया।
लोक संस्कृति के संरक्षण का सशक्त मंच
समारोह को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि विलासा की नगरी बिलासपुर के लोगों का असीम प्रेम और अपनापन ही इस महोत्सव की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि बिलासा महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का अद्भुत और जीवंत दर्शन होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंच के संरक्षक चंद्रप्रकाश देवरस ने कहा कि किसी सांस्कृतिक संस्था का 36 वर्षों तक निरंतर सफलतापूर्वक संचालित होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
विशिष्ट अतिथि और संरक्षक अनिल व्यास ने कहा कि अंचल के लोक कलाकारों, लोकसंगीत और लोकसंस्कृति को मंच देने का कार्य बिलासा मंच पिछले 36 वर्षों से लगातार कर रहा है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
इससे पहले मंच के संस्थापक ने अपने संबोधन में महोत्सव की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि इस मंच की शुरुआत एक छोटे से कार्यक्रम में बांस गीत की प्रस्तुति से हुई थी। धीरे-धीरे यह आयोजन विस्तृत होता गया और आज यह मंच वर्ष भर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से शहर और प्रदेश की जनता से जुड़ा हुआ है।
लोक कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियाँ
समारोह में विभिन्न लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगायिका रेखा देवार और उनके साथियों ने देवार गीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी।
इसके बाद बालोद से आए लोक कलाकार संजू सेन और उनकी टीम ने 50 से अधिक वाद्ययंत्रों को एक साथ बजाकर माहौल को संगीतमय बना दिया। उनकी टीम ने मादरी नृत्य और आंगा देव नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
रायपुर से आई प्रभा कटारे और उनके 25 से अधिक साथियों ने बारहमासी गीत, करमा, ददरिया और आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति देकर मंच पर छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के रंग बिखेर दिए। वहीं लिमहागढ़ के कलाकारों ने करमा नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे कलाकार और दर्शक
कार्यक्रम का संचालन मंच के अध्यक्ष महेश श्रीवास, रश्मि गुप्ता और महेंद्र ध्रुव ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संयोजक रामेश्वर गुप्ता ने किया।
इस अवसर पर डॉ. सुधाकर बिबे, डॉ. अजय पाठक, डॉ. भगवती प्रसाद चंद्रा, चंद्रप्रकाश बाजपेयी, राघवेंद्र दीवान, डॉ. देवधर महंत, राजेंद्र मौर्य, यश मिश्रा, दिनेश्वर राव जाधव सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
36 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा बिलासा महोत्सव छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

