futuredताजा खबरें

यर बाजार में गिरावट जारी, निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ की कमी

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 829 अंक यानी करीब 1.08 प्रतिशत गिरकर 76,034.42 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी-50 सूचकांक 228 अंक या 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,639 पर बंद हुआ।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 0.32 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

इस सप्ताह बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 2,884 अंक यानी 3.65 प्रतिशत तक फिसल चुका है, जबकि निफ्टी लगभग 811 अंक या 3.3 प्रतिशत तक गिर गया है।

निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट

बाजार में आई इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 450 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 440 लाख करोड़ रुपये रह गया। सिर्फ गुरुवार को ही निवेशकों को करीब 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

See also  गैस आपूर्ति पर सख्ती, शिकायत के लिए टोल फ़्री नम्बर जारी

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार की गिरावट का प्रमुख कारण है। ब्रेंट क्रूड का दाम एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। इराकी जलक्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में वृद्धि का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

रुपये में कमजोरी

भारतीय रुपये में भी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर लगभग 92.19 के स्तर पर बंद हुआ और कारोबार के दौरान यह रिकॉर्ड निचले स्तर 92.36 तक पहुंच गया। रुपये की कमजोरी विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न कम कर देती है, जिससे पूंजी का बहिर्वाह बढ़ सकता है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

मार्च के शुरुआती दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार भारतीय शेयरों की बिकवाली कर रहे हैं। केवल सात कारोबारी सत्रों में ही एफआईआई ने नकद बाजार में 39 हजार करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच दिए हैं। यह लगातार नौवां महीना है जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से निकासी कर रहे हैं।

See also  रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से प्रशिक्षु न्यायाधीशों की मुलाकात, न्यायपालिका की जिम्मेदारियों पर दिया मार्गदर्शन

मध्य पूर्व में युद्ध से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष और उसके बढ़ने की आशंका ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरे के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

बढ़ते मैक्रो आर्थिक जोखिम

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व का संघर्ष लंबा खिंचता है तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में वृद्धि करनी पड़ सकती है, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है।

अस्वीकरण:
यह खबर केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें व्यक्त विचार विश्लेषकों या ब्रोकिंग फर्मों के हो सकते हैं। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना आवश्यक है, क्योंकि बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।