ईरान-इज़राइल युद्ध में नया मोड़: तुर्किये की ओर बढ़ी मिसाइल नाटो ने रोकी
अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध पांचवें दिन और अधिक गंभीर हो गया, जब ईरान की ओर से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को तुर्किये की सीमा की ओर बढ़ते समय नाटो की वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया। तुर्की अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
संघर्ष की शुरुआत उस संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमले के बाद हुई थी, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई। इसके बाद से ईरान ने इज़राइल समेत इराक, जॉर्डन और खाड़ी देशों की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनका लक्ष्य अमेरिकी ठिकाने बताए जा रहे हैं।
अब तक तुर्किये को इन हमलों से अलग रखा गया था, लेकिन बुधवार को स्थिति बदल गई। ईरान से दागी गई मिसाइल इराक और सीरिया के रास्ते तुर्किये के हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रही थी, जिसे नाटो की रक्षा प्रणाली ने रास्ते में ही रोक दिया।
अमेरिका और नाटो की प्रतिक्रिया
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान से बातचीत में कहा कि तुर्की की संप्रभुता पर हमला अस्वीकार्य है और अमेरिका पूर्ण समर्थन देगा।
नाटो की प्रवक्ता ने भी बयान जारी कर कहा कि संगठन अपने सभी सहयोगियों, विशेषकर तुर्किये, के साथ मजबूती से खड़ा है। गौरतलब है कि नाटो संधि का अनुच्छेद 5 किसी एक सदस्य पर हमले को सभी पर हमला मानता है, हालांकि इसे लागू करने के लिए राजनीतिक सहमति आवश्यक होती है।
तुर्किये ने इस घटना के बाद ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
तुर्किये की रणनीतिक अहमियत
तुर्किये के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan ने हाल ही में मध्य पूर्व में रक्तपात रोकने और युद्धविराम की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है। हालांकि उन्होंने अमेरिका-इज़राइल की शुरुआती कार्रवाई को “अवैध” भी बताया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्किये पर सीधा हमला ईरान के लिए महंगा साबित हो सकता है। तुर्किये न केवल नाटो का सदस्य है, बल्कि उसके पास मजबूत सैन्य क्षमता और पश्चिमी देशों से करीबी रिश्ते हैं। ऐसे में उस पर हमला नाटो की सामूहिक रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर सकता है, जिससे संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है।
ईरान के लिए जोखिम क्यों ज्यादा?
विश्लेषकों के अनुसार, खाड़ी देशों पर हमले से ईरान अमेरिका को संदेश तो दे सकता है, लेकिन तुर्किये पर हमला करने का अर्थ होगा सीधे नाटो ढांचे को चुनौती देना। इससे राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक कीमत बहुत अधिक हो सकती है।
अंकारा स्थित विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्किये ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक माध्यम भी है। यदि तुर्किये को सीधे निशाना बनाया गया, तो बातचीत और मध्यस्थता के रास्ते भी बंद हो सकते हैं।
इसलिए अब तक तुर्किये को निशाने से बाहर रखना ईरान की रणनीतिक गणना का हिस्सा माना जा रहा था। हालांकि ताजा घटना ने संकेत दे दिए हैं कि संघर्ष का दायरा अनिश्चित दिशा में बढ़ सकता है।

