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राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस : सुरक्षित राष्ट्र, सशक्त नागरिक

रेखा पाण्डेय (लिपि)

सुरक्षा अर्थात किसी भी क्षेत्र में विशेष सतर्कता रखने की जिम्मेदारी। किसी भी देश, समाज, परिवार एवं व्यक्ति को सुरक्षित करने और शांति व्यवस्था को बनाए रखने हेतु नियमों का जागरूकता के साथ कठोरता से पालन किया जाना अति आवश्यक है। यही देश की स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य है।

राष्ट्र के अस्तित्व एवं विकास के लिए सुरक्षा ही महत्वपूर्ण तत्व है। देश की सुरक्षा केवल सीमा रेखाओं पर बाहरी शक्तियों से रक्षा तक सीमित नहीं होती। देश की आंतरिक सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर बहुत बारीकी से ध्यान केंद्रित कर उन्हें सुरक्षित करने हेतु किए गए प्रयासों एवं नीतियों पर भी निर्भर करती है। क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा एक ऐसी प्रणाली है जिसमें राष्ट्र के सभी आवश्यक अंग या क्षेत्र परस्पर जुड़े होते हैं। उनमें संतुलन बनाए रखना अति आवश्यक है। समस्त कार्य प्रणाली में असंतुलन हो जाने से देश और नागरिकों में अशांति, असंतोष एवं अराजकता का संकट उत्पन्न हो सकता है।

4 मार्च 1966 को श्रम मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर सतत सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण आंदोलन विकसित करना था। सर्वप्रथम 1972 में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया गया। देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस तथा 4 मार्च से 10 मार्च तक सुरक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाकर देश के नागरिकों को सजग करने के लिए यह कार्यक्रम सुरक्षा सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।

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राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ

राष्ट्रीय सुरक्षा का तात्पर्य किसी राष्ट्र और राज्य को बाहरी एवं आंतरिक खतरों से सुरक्षित रखने की क्षमता से है। देश में कानून व्यवस्था बनाए रखना, आतंकवाद, साम्प्रदायिक हिंसा, उग्रवाद, अराजकता एवं अन्य हानिकारक गतिविधियों को रोकना, जो देश और देश की जनता को नुकसान पहुंचा सकती हैं, आंतरिक सुरक्षा के अंतर्गत आता है।

देश की बाहरी सुरक्षा के अंतर्गत देश की सीमाओं की रक्षा, नीति और कूटनीति पर विशेष बल देना आवश्यक होता है ताकि बाहरी सैन्य आक्रमण से देश की रक्षा हो सके। अपराधों को कम करने और देश की एकता, अखंडता तथा राजनीतिक स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को व्यापक स्तर पर व्यवहार में लाना अत्यंत आवश्यक है।

सुरक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में मातृभूमि की सुरक्षा, सैन्य सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, राजनीतिक सुरक्षा, सामाजिक और सांस्कृतिक सुरक्षा, जैव एवं पारिस्थितिक सुरक्षा, संसाधन सुरक्षा, पर्यावरणीय सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सुरक्षा, परमाणु सुरक्षा, ध्रुवीय सुरक्षा, सड़क सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, साइबर और तकनीकी सुरक्षा आदि शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय शांति और बचाव अभियानों में भाग लेकर अंतर्राष्ट्रीय उत्तरदायित्वों और कर्तव्यों को सक्रिय रूप से निभाने के लिए भी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।

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डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के अनुसार,
“कमजोर राष्ट्र कभी सुरक्षित नहीं रह सकता। शक्ति ही शक्ति का सम्मान करती है।”

इतिहास इस बात का प्रमाण है कि जो राष्ट्र अपनी रक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं, वे अपनी संप्रभुता खो देते हैं। एक सुरक्षित राष्ट्र वही है जहां के नागरिक भयमुक्त होकर अपने सपनों को साकार कर सकें।

राष्ट्र की सीमाएं केवल मानचित्र की रेखाएं नहीं होतीं, वे लाखों शहीदों के बलिदान की रक्षा कवच होती हैं। हथियार केवल तभी तक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं जब तक उन्हें चलाने वालों के हाथों में संकल्प और हृदय में देशभक्ति हो।

अतः सुरक्षा केवल बाहरी आक्रमण से ही नहीं, बल्कि आंतरिक आर्थिक और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ी होती है।

प्रतिवर्ष देश की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एक थीम निर्धारित कर उस दिशा में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़े। वर्ष 2026 की थीम है —
“उन्नत सुरक्षा के लिए लोगों को संलग्न करें, शिक्षित करें और सशक्त बनाएं।”

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस एवं सप्ताह का उद्देश्य और कार्यक्रम

• सामान्य जनजीवन की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य की रक्षा के लिए देश के प्रत्येक क्षेत्र में आंदोलन के रूप में प्रचार-प्रसार कर सुरक्षा को बढ़ावा देना।

• समस्त कर्मचारियों एवं नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।

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• औद्योगिक क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर जनजागरूकता बढ़ाना।

• सप्ताह भर सुरक्षा कार्यक्रमों के अंतर्गत कार्यशालाएं, प्रशिक्षण और सेमिनार आयोजित कर जागरूकता अभियान चलाना।

• राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के बैनर और स्लोगन विभिन्न स्थानों पर लगाना तथा प्रदर्शनियों का आयोजन करना।

• कर्मचारी इस विशेष दिन राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस और सप्ताह का बैच लगाकर प्रदर्शन करते हैं, ताकि लोगों को सुरक्षा का महत्व पता चल सके।

• सुरक्षा के लिए आपातकालीन अभ्यास का आयोजन करना।

• स्थानीय समाचार पत्रों में लेख, स्लोगन तथा टेलीविजन के माध्यम से लघु फिल्मों और प्रेरणादायक विज्ञापनों का प्रसारण कर देशभर के नगर, गांव, गली और मोहल्लों में सुरक्षा व्यवस्था के प्रति जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित करना।

अपने स्थापना दिवस 4 मार्च के उपलक्ष्य में चलाया जाने वाला राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस और सप्ताह अभियान सभी क्षेत्रों में सुरक्षा जागरूकता के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह अभियान व्यापक, सामान्य और लचीला है। इसमें भाग लेने वाले संगठनों से उनकी सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार विशिष्ट गतिविधियों को विकसित करने का आग्रह किया जाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।