सिमगा में दत्तात्रेय सिद्ध शक्तिपीठ की स्थापना, एकमुखी चतुर्भुज मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न
रायपुर, 01 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के तहसील मुख्यालय सिमगा में विष्णु स्वरूप भगवान दत्तात्रेय सिद्ध शक्तिपीठ की स्थापना की गई है। नवनिर्मित मंदिर में भगवान दत्तात्रेय की बैठी हुई एकमुखी चतुर्भुज प्रतिमा की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा फाल्गुन शुक्ल पंचमी, 22 फरवरी 2026 को सम्पन्न हुई।
वरिष्ठ पत्रकार रणजीत भोंसले ने बताया कि इस स्वरूप की यह देश की पहली एवं अब तक की एकमात्र प्रतिमा मानी जा रही है। मंदिर का निर्माण रणजीत भोंसले एवं उनके परिवार द्वारा गुरु अण्णा महाराज इंदौर के मार्गदर्शन में अपनी निजी भूमि पर लगभग साढ़े छह वर्षों की अवधि में कराया गया है।
यह शक्तिपीठ रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर, बिलासपुर से 70 किलोमीटर तथा सिमगा नगर से करीब एक किलोमीटर दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे कोतरी नाला के पास स्थित है। मंदिर निर्माण का भूमिपूजन 15 जुलाई 2019 को गुरु पूर्णिमा एवं स्वर्गीय संपत राव भोंसले के जन्मदिवस पर किया गया था।
मंदिर स्थापना की विशेषता यह रही कि निर्माण स्थल की मिट्टी लेकर देशभर के भगवान दत्तात्रेय से जुड़े 30 प्रमुख तीर्थ स्थलों में अभिषेक कराया गया तथा वहां की पवित्र मिट्टी सिमगा लाकर मूर्ति स्थापना के समय आधार में स्थापित की गई। इसके अतिरिक्त 21 तीर्थ स्थलों से भभूत, यंत्र, सिक्के एवं पूजनीय सामग्री भी आचार्यों द्वारा प्रदान की गई, जिन्हें मूर्ति के नीचे स्थापित किया गया है।
प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान तीन दिवसीय वैदिक विधि से सम्पन्न हुआ। गाणगापुर (कर्नाटक) स्थित निर्गुण पादुका मठ के मुख्य पुजारी वैभव पुजारी सहित वेदशास्त्र निपुण आचार्यों ने अनुष्ठान संपन्न कराया। कलशारोहण शिवशक्ति आश्रम नर्मदापुरम के संन्यासी नर्मदामणि महाराज के करकमलों से हुआ।
समारोह में प्रयागराज से अवधेश पारिक, चित्रकूट से शिव नरेश मिश्रा, चित्रकूटधाम गोंदिया से योगी रामनाथ, कराड से अरविंद जोशी, गोरखनाथ पीठ मनु डोंगर के महंत हरिहर नाथ योगी सहित विभिन्न तीर्थों से आए संत-महात्मा उपस्थित रहे।
गुरु अण्णा महाराज के निर्देशानुसार मंदिर परिसर में दत्त स्वरूप एवं नवनाथ परंपरा के प्रतीक स्वरूप औदुम्बर वृक्ष भी रोपित किए गए हैं, जिन्हें दत्त परंपरा में पूजनीय माना जाता है। गुरु अण्णा महाराज ने इस स्थल को क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक शक्ति केंद्र बताया।
प्राण प्रतिष्ठा अवसर पर उपस्थित साधु-संतों का शाल, श्रीफल एवं हिंदी अनुवादित ‘श्रीपाद श्रीवल्लभ चरितामृत’ ग्रंथ भेंट कर सम्मान किया गया। समारोह में सिमगा एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
