हो सके तो…इतना ज़रूर करना

(ब्लॉगर एवं पत्रकार )
हो सके तो
इतना ज़रूर करना,
उन परमाणु बमों को
नष्ट कर देना, जिनसे
हमारी इस हरी -भरी
धरती और उस पर
रंग -बिरंगे फूलों की तरह
खिलते जन जीवन के
हमेशा के लिए नष्ट हो
जाने का खतरा है,
हो सके तो रोक लेना
उस बेरहम युद्ध को, जो
स्कूलों और अस्पतालों पर
बम बरसा रहा है.
नष्ट कर देना इंसानियत के दुश्मन
उन घातक बमों को,
जिनसे फिर न झुलसे कोई
हिरोशिमा और कोई नागासाकी.
नष्ट कर देना उन वैक्यूम बमों को
जिनसे भाप बनाकर
उड़ा दिए गए गज़ा पट्टी
के हजारों इंसान.
नष्ट कर देना उन
निर्मम हृदयों के पथरीले
इरादों को, जिन्होंने
इंसानियत के खिलाफ़ युद्ध में उजाड़ा
इराक, अफगानिस्तान,
सीरिया और फिलिस्तीन सहित
और भी कई देशों को,
तबाह कर दी
वहाँ के लोगों की ज़िन्दगी.
हो सके तो नष्ट कर देना
उन प्रयोग शालाओं को
जहाँ बनते हैं मानवता को
मटियामेट करने के इरादे से
ऐसे घातक हथियार,
बनती हैं दरिंदगी करने वाली
मिसाइलें,
हो सके तो नष्ट
कर देना उन बेरहम दिमागों को,
जिनमें जन्म लेते हैं
पृथ्वी को नष्ट करने के
विनाशकारी इरादे,
जिनमें पैदा होते हैं
ऐसे घातक हथियार बनाने के विचार
हो सके तो
नष्ट कर देना उन हाथों को
जो बनाते हैं मानवता के खिलाफ़
ऐसे हथियार.
इन सबके नष्ट होने पर ही
बची रहेगी हमारी धरती,
बचे रहेंगे हम और तुम
और हमारे जैसे
करोड़ों -अरबों इंसान
एक खुशनुमा ज़िन्दगी के लिए.
-स्वराज्य करुण
