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27 IAS और 24 IFS अफसरों पर भ्रष्टाचार का साया, जांच में खुलासे, कुछ जेल में, कुछ मलाईदार पदों पर काबिज

छत्तीसगढ़ प्रदेश में भ्रष्टाचार के आरोपों ने 27 आईएएस और 24 आईएफएस अफसरों को जांच के दायरे में ला दिया है। इनमें से कुछ ने अपने पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया, तो कुछ ने कमीशनखोरी के जरिए राज्य सरकार आथिक हानि पहुंचाई। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और विभागीय जांच के तहत इन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। कई को आरोपी बनाकर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जबकि कुछ जमानत पर बाहर हैं। हैरानी की बात यह है कि कुछ अफसर जांच के बावजूद अभी भी महत्वपूर्ण और मलाईदार पदों पर बने हुए हैं।

यह खुलासा विधानसभा में भाजपा विधायक राजेश मूणत के एक सवाल के जवाब में सामने आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2019 से 16 दिसंबर 2024 तक इन 27 आईएएस और 24 आईएफएस अफसरों के खिलाफ कुल 31 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनकी जांच जारी है। मूणत ने पूछा था कि इन शिकायतों की जांच किस स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और जांच को जल्द पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि ईओडब्ल्यू और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा जांच अधिकारियों को समय-समय पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। हालांकि, संसाधनों की कमी के बावजूद जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

जांच के दायरे में आए आईएफएस अफसर:

केके खेलवार, गोवर्धन, एस वेंकटाचलम, आरके जांगड़े, आलोक तिवारी, उत्तम कुमार गुप्ता, अरुण पांडेय, पंकज राजपूत, एसके पैकरा, रमेश चंद्र दुग्गा, गुरुनाथन एन, समा फारुखी, चूरामिण सिंह, लक्ष्मण सिंह, विवेकानंद झा, जनकराम नायक, राकेश चतुर्वेदी, दिलेश्वर साहू, शशि कुमार, आलोक कटियार, कुमार निशांत।

जांच के दायरे में आए आईएएस अफसर:

राजेश कुमार टोप्पो, संजय अलंग, रानू साहू, समीर विश्नोई, डॉ. आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा, विवेक ढांड, निरंजन दास, कुलदीप शर्मा, सुरेंद्र कुमार जायसवाल, गौरव द्विवेदी, नरेंद्र कुमार दुग्गा, अशोक अग्रवाल, पुष्पा साहू, सुधाकर खलखो, राजेश सिंह राणा, डीडी सिंह, एस प्रकाश, अमृत कुमार खलखो, नुपुर राशि पन्ना, किरण कौशल, टी. राधाकृष्णन, संजीव कुमार झा, इफ्फत आरा, भुवनेश यादव, जीवन किशोर ध्रुव, टामन सिंह सोनवानी।

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यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की गति और प्रभावशीलता को भी कठघरे में खड़ा करता है।