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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की प्रचंड बहुमत से जीत, भाजपा को करना पड़ा 15 सीटों से संतोष

छत्तीसगढ़ में भाजपा के खिलाफ़ कांग्रेस की ऐसी लहर चली कि सारे एक्जिट पोल झूठे पड़ गये। एक्जिट पोल यहां कड़ी दिखाकर भाजपा को विजयी बना रहे थे, परन्तु वे अंडर करेंट को बूझ नहीं पाए। मतदाताओं ने भी खामोशी के साथ मतदान किया और अपनी प्रतिक्रिया वोट के माध्यम से दी। किसी के सामने प्रत्यक्ष जाहिर नहीं की।
स्वयं कांग्रेस को इतनी बड़ी जीत का अंदेशा नहीं था। भाजपा के कई मंत्रियों को हार का सामना पड़ा तथा वह पन्द्रह सीट तक सिमट गई। जो बस्तर और सरगुजा बीजेपी की जीत में सहायक बनते थे वहाँ से उसका पूरी तरह सफ़ाया हो गया। कुछ कद्दावर मंत्री अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे, वहीं डॉक्टर रमन सिंह भी सम्मानजनक अंतर बनाने में कामयाब नहीं रहे।
कांग्रेस को 68 सीट के साथ भरपूर जनमत मिला और भाजपा सिर्फ़ 15 सीटों पर सिमट गई। छत्तीसगढ़ निर्माण के पश्चात ऐसा पहली बार हुआ कि कोई राजनैतिक दल इतने बड़े बहुमत के साथ विधानसभा में दाखिल हो रहा है। इसके पीछे जनता का खामोशी से मतदान कर सत्ता बदलाव करने का मन रहा है।
सरगुजा से लेकर बस्तर तक के मंत्री चुनाव हार गये। जिसमें रामसेवक पैकरा, भईयालाल राजवाड़े, केदार कश्यप, महेश गागड़ा, दयालदास बघेल, राजेश मूणत, प्रेमप्रकाश पाण्डेय और अमर अग्रवाल सम्मिलित हैं। वहीं आई ए एस से त्यागपत्र देकर चुनावी मैदान में उतर ओमप्रकाश चौधरी भी खरसिया से चुनाव हार गए।
भाजपा ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इतनी तगड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। वहीं उनके पड़ोस भाटापारा से शिवरतन शर्मा ने अपनी जीत दर्ज की तथा जोगी कांग्रेस ने भी यहाँ अच्छा प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री के गृह जिले कवर्धा से कांग्रेस के मोहम्मद अकबर ने लगभग 71 हजार वोटों से जीत दर्ज की, वहीं रायपुर से श्रीचंद सुंदरानी, धरसींवा से देवजी पटेल, ग्रामीण से नंदे साहू, आरंग से संजय ढीढी तथा अभनपुर से चंद्रशेखर साहू चुनाव हार गए। वैसे भी चंद्रशेखर साहू को अभनपुर से प्रत्याशी बनाने पर कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था।
कोटा विधान सभा से जोगी कांग्रेस की प्रत्याशी रेणु जोगी पांच हजार से अधिक मतों तथा स्वयं अजीत जोगी लगभग चालिस हजार मतों से चुनाव जीत गए, वहीं बी एस पी के टिकट पर चुनाव लड़ रही उनकी बहु ॠचा जोगी भाजपा के सौरभ सिंह से लगभग चार हजार वोटों से हार गई।
इस तरह प्रचंड बहुमत से कांग्रेस सता पर काबिज होती दिखाई दे रही है। अब मुख्यमंत्री कौन होगा इस पर कयास लगाए जा रहे हैं। वैसे भी कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं, जिनमें भुपेश बघेल, टी एस बाबा, चरणदास महंत, धनेन्द्र साहू ताम्रध्वज साहू आदि कद्दावर नेता शामिल हैं।
जब से भुपेश बघेल ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल कर हताश हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई उर्जा का संचार किया तथा विधानसभा में विपक्ष के नेता टी एस बाबा ने कांग्रेस का घोषणा पत्र बनाने में बहुत मेहनत की। प्रदेश के हर वर्ग से मिलकर उनके विचार जाने तथा लगभग एक लाख लोगों से मिलकर घोषणा पत्र तैयार किया।
लोगों की निगाह इस ओर लगी है कि कब कांग्रेस के हाईकमान विधायक दल की बैठक में प्रदेश के मुखिया का चयन करेंगे। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि यह कांग्रेस के संघर्ष एवं नेताओं की सक्रीयता की जीत है। अब भविष्य ही बताएगा कि वे अपने वादों पर कितने खरे उतरते हैं।