futuredछत्तीसगढताजा खबरें

UPI भुगतान नियमों में बड़ा बदलाव: अब हर ट्रांजेक्शन के लिए दो-स्तरीय सत्यापन अनिवार्य

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाने के लिए UPI से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाना और लेनदेन की जवाबदेही बढ़ाना है।

नए नियमों के तहत अब अधिकांश ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है। यानी अब केवल UPI PIN डालकर भुगतान पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके साथ एक अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया भी करनी होगी। यह सत्यापन OTP, फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन के माध्यम से किया जा सकेगा।

RBI के अनुसार, जब तक यूजर दोनों स्तर की पुष्टि पूरी नहीं करता, तब तक भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अगर किसी को आपका PIN पता भी चल जाए, तब भी वह बिना आपकी अनुमति के ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेगा।

हालांकि, इस बदलाव के चलते भुगतान प्रक्रिया पहले की तुलना में थोड़ी धीमी हो सकती है, क्योंकि हर लेनदेन में एक अतिरिक्त स्टेप जुड़ गया है। लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें  बिखरता सामाजिक ताना-बाना: राजनीतिक लाभ के लिए आपसी भाईचारे को दांव पर लगाने की साजिश

वहीं, सभी ट्रांजेक्शन पर यह नियम समान रूप से लागू नहीं होगा। विश्वसनीय डिवाइस (trusted devices) से किए जाने वाले छोटे लेनदेन को आसान रखा जा सकता है, जबकि बड़ी राशि या नए डिवाइस से किए गए भुगतान में अतिरिक्त जांच की जा सकती है।

इसके अलावा, RBI ने बैंकों और भुगतान प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी बढ़ाई है। अगर किसी तकनीकी खामी या सिस्टम फेल होने के कारण यूजर के साथ धोखाधड़ी होती है, तो संबंधित बैंक या प्लेटफॉर्म को नुकसान की भरपाई करनी होगी और शिकायत का जल्द समाधान करना होगा।

एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब UPI के जरिए एटीएम से निकासी को सामान्य ATM ट्रांजेक्शन की तरह गिना जाएगा। इसका मतलब है कि यह आपके मासिक फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट में शामिल होगा। निर्धारित सीमा पार करने के बाद हर अतिरिक्त निकासी पर 23 रुपये (कर अतिरिक्त) का शुल्क देना होगा।

डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच RBI के ये नए नियम सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें  परंपरा से खिलवाड़ का 'अदृश्य' न्याय? जानिए क्यों जामड़ीपाठ के बुजुर्ग ग्रामीणों ने कहा - "नाखुश हैं हमारे प्राकृतिक देवी-देवता