हिंदी पत्रकारिता

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पंडित माधवराव सप्रे जिन्होंने 126 वर्ष पहले छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता का पौधा लगाया

हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के पुरोधा पंडित माधवराव सप्रे की जयंती पर विशेष आलेख। जानिए कैसे उन्होंने वर्ष 1900 में ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ की स्थापना कर छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की नींव रखी, ‘हिंदी केसरी’ का प्रकाशन किया, लोकमान्य तिलक के ग्रंथों का हिंदी अनुवाद किया और राष्ट्रीय चेतना के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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futuredहमारे नायक

स्वातन्त्र्य यज्ञ के कर्मवीर पं. माखनलाल चतुर्वेदी

माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन, साहित्य, पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर विस्तृत लेख। ‘पुष्प की अभिलाषा’ के रचयिता की राष्ट्रीय चेतना और क्रांतिकारी भूमिका का विश्लेषण।

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futuredसमाज

कलम में ही वह शक्ति है, जो समाज को बदल सकती है : हिंदी पत्रकारिता दिवस

हिंदी पत्रकारिता का इतिहास न केवल एक भाषा के माध्यम का विकास है, बल्कि यह भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना का दर्पण भी है।

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