डॉ. हेडगेवार का राष्ट्रचिंतन और संघ स्थापना का मूल उद्देश्य
डॉ. हेडगेवार के राष्ट्रचिंतन, अनुभव और दृष्टिकोण के आधार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के पीछे के विचार, उद्देश्य और संगठनात्मक दर्शन का विस्तृत विश्लेषण।
Read Moreडॉ. हेडगेवार के राष्ट्रचिंतन, अनुभव और दृष्टिकोण के आधार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के पीछे के विचार, उद्देश्य और संगठनात्मक दर्शन का विस्तृत विश्लेषण।
Read Moreराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा रामजी के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन मूल्यों से प्रेरित संगठन की सौ वर्षीय ध्येयनिष्ठ और संघर्षशील यात्रा का प्रतीक है।
Read Moreप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने RSS के शताब्दी समारोह में भाग लेते हुए संगठन के राष्ट्र निर्माण में योगदान की सराहना की और एक विशेष सिक्का और डाक टिकट जारी किया। उन्होंने कहा कि संघ ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अब तक ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के लिए अनेक बलिदान दिए हैं।
Read Moreराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर शताब्दी वर्ष तक की विचारपूर्ण, ऐतिहासिक और सामाजिक यात्रा को जानिए, जिसमें डॉ. हेडगेवार के दृष्टिकोण, संगठन की पृष्ठभूमि, प्रेरक घटनाएँ और राष्ट्रहित में संघ का योगदान शामिल है।
Read Moreगुरु पूर्णिमा पर आधारित यह आलेख भारतीय गुरू-शिष्य परंपरा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भगवद्ध्वज पूजन की परंपरा, और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की गहराई से व्याख्या करता है।
Read Moreमाधव सदाशिव गोलवलकर, जिन्हें “परम पूज्य गुरुजी” के नाम से जाना जाता है, का जन्म 19 फ़रवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ। उनके पिता सदाशिवराव ‘भाऊ जी’ शिक्षक थे, और माता लक्ष्मीबाई ‘ताई’ धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की वाहक थीं। बचपन से ही असाधारण मेधा के धनी माधव जी की शिक्षा दो वर्ष की आयु से ही प्रारंभ हो गई थी।
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