भारत ने क्षण भर के लिए भी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की : प्रो बलदेव भाई शर्मा

रायपुर/स्वतंत्रता आंदोलन में पत्र पत्रिकाओं एवं पत्रकारों की भूमिका विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन दक्षिण कोसल टुडे द्वारा 15 सितंबर की संध्या 7 बजे अंतरजाल पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बलदेव भाई शर्मा जी ने की। इस कार्यक्रम में आज़ादी की लड़ाई में पत्रकारों की भूमिका विषय पर छत्तीसगढ़ के संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार गिरीश पंकज एवं  राष्ट्रीय संदर्भ में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी अपना व्याख्यान दिया।

आजादी के आंदोलन में छत्तीसगढ़ की पत्र-पत्रिकाओं एवं पत्रकारों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए गिरीश पंकज  ने वर्ष 1900 में माधवराव सप्रे जी की छत्तीसगढ़ मित्र पत्रिका से लेकर 1947 की रायपुर समाचार पत्रिका के संपादक घनश्याम प्रसाद श्याम जी को याद किया। उन्होंने बताया कि आज़ादी के योगदान में छत्तीसगढ़ के पत्रकारों का अहम योगदान रहा है। 1947 तक आज़ादी का नवजागरण जगाने वाली 40 से अधिक पत्रिकाओं का प्रकाशन होने लगा था।

आईआईएमसी के महानिदेशक  प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि लेखनी प्रत्येक काल में समाज का मार्गदर्शन करते आई है। जब जब समाज में दिग्भ्रम आता है, भटकाव आता है, तब तब लेखनी का सिपाही समाज का मार्गदर्शन का काम करता करता है। ऐसे अनेक पत्रकार एवं साहित्यकार हुए जिन्होंने राष्ट्रीयता की अलख जगाई और भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री द्विवेदी जी ने 1857 से अपनी लेखनी से स्वाधीनता की अलख जगाने वाले अजीमुल्ला खान से लेकर भीमराव आंबेडकर जी पत्रिकाओं के योगदान को याद किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारत ने क्षण भर के लिए भी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की थी अब तक हमें गलत जानकारी दी गई कि भारत सैकड़ों वर्षों से भारत गुलाम रहा जबकि भारत का इतिहास संघर्षों का इतिहास रहा है। आने वाली पीढ़ियों को हमारे नवजवानों को हमारा  संघर्ष पूर्ण इतिहास अवश्य पता होना चाहिए कि कैसे अंग्रेजों से संघर्ष कर हमने आज़ादी पाई है।

आलेख प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार श्रीमती रेखा पाण्डेय, अम्बिकापुर, द्वितीय पुरस्कार श्री चोवाराम बादल, हथबंध भाटापारा एवं तृतीय पुरस्कार श्रीमती संध्या शर्मा नागपुर, महाराष्ट्र को दिया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन दक्षिण कोसल टुडे संपादक ललित शर्मा ने किया। कार्यक्रम में सेंटर फॉर स्टडीज ऑन हॉलिस्टिक डेवलपमेन्ट, छत्तीसगढ़ के सचिव श्री विवेक सक्सेना सहित अनेक पत्रकार एवं विभिन्न विश्वविद्यालय-महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं वेबीनार में अपनी सजग उपस्थिति दी।

One thought on “भारत ने क्षण भर के लिए भी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की : प्रो बलदेव भाई शर्मा

  • September 16, 2021 at 15:21
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    बहुत सुंदर। बधाई

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