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आशीष ठाकुर की कृति द मोर्सल्स ऑफ लव का लोकार्पण

उनकी बहुप्रतीक्षित किताब, द मोर्सल्स ऑफ लव- प्रेम के सभी रूपों – भावुकता, आदर्शवादिता और निस्वार्थता – की हार्दिक खोज है। भावपूर्ण छंदों और गीतात्मक रचनाओं के माध्यम से, ठाकुर भावनाओं की एक ऐसी ताने-बाने को बुनते हैं जो पाठकों के अंतःकरण में प्रतिध्वनित होती है, उन्हें अपने अनुभवों और रिश्तों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करती है।

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मन है हिन्दू तन है हिन्दू

हिन्दू हिंदी हिंन्दीस्तान के स्वप्नों को हमने देखा है, सार्वभौमिकता के सिंद्धातों से वतन को हमने सींचा है।

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प्रणम्य लेखनी के अक्षर पुरुष : साँवरमल सांगानेरिया का लोकार्पण

वाराणसी के डॉ राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय स्मृति समारोह के प्रथम सत्र में डॉ शुभदा पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक प्रणम्य लेखनी के अक्षर पुरुष : साँवरमल सांगानेरिया का लोकार्पण साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ के. श्रीनिवासराव, विख्यात कहानीकार गोविंद मिश्र, प्रोफेसर चितरंजन मिश्र, डॉ जितेंद्र नाथ मिश्र, प्रोफेसर रामसुधार सिंह, डॉ दयानिधि , डा.आर्यमा सान्याल, के करकमलों से संपन्न हुआ।

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कालीदास के मेघदूत में वर्णित रामगिरि से अलकापुरी तक का काव्यमय यात्रा वृत्तांत

कालीदास का मेघदूत न केवल एक प्रेम काव्य है, बल्कि यह प्राचीन भारत के भूगोल, संस्कृति, और प्राकृतिक सौंदर्य का एक जीवंत दस्तावेज भी है। रामगढ़ से अलकापुरी तक की यह काल्पनिक यात्रा हमें भारत की विविधता और समृद्ध विरासत से परिचित कराती है।

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अब त्योहारों में वो बात नहीं

होली मिलन दिवाली पूजा, होता है सब कुछ अब भी, पर पहले वाली मुलाकात नहीं रहती, होली और दीवाली हमको याद नहीं रहती।

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किसने कहा था? मनकही

किसी भी परिवार, समाज और राष्ट्र का कल्याण कर्मण्य मनुष्यों के द्वारा ही हो सकता है। इनके कार्य ही आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बन कर्मवीर बनने का आदर्श स्थापित करते हैं। अतः प्रत्येक इंसान को कर्मशील रहना चाहिए। महाभारत में श्री कृष्ण ने कहा है ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते।’

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