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शिक्षा, समाज और राष्ट्र पर डॉ. मोहन भागवत का दृष्टिकोण : तीन दिवसीय संवाद

दिल्ली में विज्ञान भवन में हुए तीन दिवसीय संवाद में डॉ. मोहन भागवत ने शिक्षा, संविधान, आरक्षण, जाति व्यवस्था, हिन्दू राष्ट्र और राष्ट्रीय सुरक्षा पर संघ की स्पष्ट विचारधारा रखी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी संवाद कार्यक्रम में 218 प्रश्नों के उत्तर देते हुए डॉ. मोहन भागवत ने शिक्षा, समाज, भाषा, जाति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर तार्किक व तथ्यपरक विचार रखे।

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पश्चिम द्वारा जनजातीय नरसंहार का दिवस है मूलनिवासी दिवस

यह लेख विश्व जनजातीय दिवस को पश्चिमी षड्यंत्र के रूप में उजागर करता है, जो औपनिवेशिक नरसंहारों की स्मृति मिटाने और भारतीय समाज को विभाजित करने का प्रयास करता है।

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लक्ष्मीबाई केलकर : राष्ट्र निर्माण में नारीशक्ति जागरण की अग्रदूत

लक्ष्मीबाई केलकर, राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और नारी जागरण की अग्रदूत थीं। उन्होंने स्त्रियों को सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र सेवा में संगठित कर भारत के उत्थान में अमूल्य योगदान दिया। यह लेख उनके जीवन, कार्य और विचारधारा पर विस्तृत प्रकाश डालता है।

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क्रेडिट की चकाचौंध या फँसने का जाल? जानिए सच

भारत में तेज गति से हो रही आर्थिक प्रगति के चलते मध्यमवर्गीय नागरिकों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है, जिनके द्वारा चार पहिया वाहनों, स्कूटर, फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन एवं मकान आदि आस्तियों को खरीदने हेतु बैंकों अथवा अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण लिया जा रहा है।

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संविधान की प्रस्तावना पर थोपे गए दो शब्द : समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता

आज प्रश्न तो यह भी उभरता है कि धर्मनिरपेक्ष जैसा कोई शब्द होता ही नहीं है – और विशेषतः भारत में तो कोई धर्मनिरपेक्ष हो ही नहीं सकता! हमारी श्रुति, गति, मति, रीति, नीति, प्रवृत्ति, प्राप्ति, स्मृति, कृति, स्तुति – आदि सभी कुछ तो स्थायी रूप से धर्म सापेक्ष है। फिर ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे ‘अशब्द’ की भला भारत में क्या आवश्यकता है?

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युवा पीढ़ी और नशे का फ़ैलता जाल : जिम्मेदार कौन ?

सामाजिक स्तर पर, हमें नशे को ग्लैमराइज करने वाली संस्कृति को बदलना होगा। मीडिया, फिल्म इंडस्ट्री, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। नशे को ‘कूल’ दिखाने के बजाय, इसके दुष्परिणामों को उजागर करने वाली कहानियां सामने लानी होंगी।

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