लोक-संस्कृति

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भारत का प्रमुख सांस्कृतिक और सामाजिक त्योहार करवा चौथ

मध्यकालीन समय में, जब समाज में युद्ध और संघर्ष सामान्य थे, करवा चौथ व्रत का महत्व और भी बढ़ गया। युद्ध पर जाने वाले सैनिकों की पत्नियाँ, अपने पतियों की सुरक्षा और कुशलता के लिए यह व्रत रखती थीं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के माध्यम से वे अपने पतियों की सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना करती थीं।

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आध्यात्मिकता और प्रकृति सौंदर्य का उत्सव शरद पूर्णिमा

भारतीय संस्कृति मे शरद ॠतु का महत्व यहाँ के जन जीवन में स्पष्ट रुप से परिलक्षित होता है। वर्षा के बीतने के पश्चात दशहरे एवं दीवाली का त्यौहार मनुष्य के जीवन में नव उल्लास एवं नव संचार लेकर आता है, जो जीवन क्षमता में वृद्धि करता है, क्योंकि प्रकृति उल्लास एवं उमंग का ही पर्याय है। प्रकृति हमें सह अस्तित्व के साथ जीना सिखाती है और वसुधा, वसुंधरा होकर चराचर जगत के जीवों के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर देती है।

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फसल उत्सव करमा नृत्य और जैव विविधता का महत्व

करमा नृत्य के बारे में कई पौराणिक कहानियाँ और धार्मिक धारणाएँ प्रचलित हैं। इसका संबंध ‘करम’ देवता से जोड़ा जाता है, जिन्हें कर्म का प्रतीक माना जाता है। करम देवता की पूजा फसलों की अच्छी पैदावार और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है।

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