लोक-संस्कृति

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भारतीय लोक संस्कृति में प्रेम, क्षमा और समरसता का उत्सव धुलेंडी

धुलेंडी पर्व के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर आधारित यह शोधपरक आलेख बताता है कि किस प्रकार रंगों का यह उत्सव मनुष्य को अहंकार से अनुराग, विभाजन से समरसता और बाह्य उत्सव से आंतरिक शुद्धि की ओर ले जा

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सामाजिक समरसता और नवजीवन का त्योहार वासन्ती नव सस्येष्टि पर्व

होली का वास्तविक स्वरूप वैदिक नवान्न यज्ञ, ऋतु परिवर्तन, कृषि संस्कृति और सामाजिक समरसता से जुड़ा है। जानिए होलिका दहन का सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक अर्थ।

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होलिका-दहन और सांस्कृतिक परम्परा पर वामपंथी वैचारिक आक्रमण

होलिका-दहन की परंपरा, प्रह्लाद कथा और भारतीय सांस्कृतिक स्मृति को वैचारिक दृष्टिकोण से विकृत किए जाने के प्रयासों पर आधारित चिंतनात्मक आलेख।

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छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पारिस्थितिकी का जीवंत सेतु छिंद का वृक्ष

छत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर में पाए जाने वाले छिंद वृक्ष का ऐतिहासिक, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व। जैव विविधता संरक्षण से लेकर छिंद रस और गुड़ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त करने की पहल पर विस्तृत आलेख।

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सूरज राही की अधूरी लेकिन अमर नाट्य-यात्रा : भूले-बिसरे कलाकार

छत्तीसगढ़ी लोक रंगमंच के प्रतिभाशाली कलाकार सूरज राही की जीवन-यात्रा, नाचा परम्परा और उनके योगदान पर आधारित एक भावपूर्ण ऐतिहासिक आलेख।

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नाट्यशास्त्र के प्रणेता आचार्य भरतमुनि ने विश्व को दी नाट्यकला : भरतमुनि जयंती माघ पूर्णिमा

भरतमुनि का नाट्यशास्त्र विश्व का प्राचीनतम नाट्यग्रंथ है, जिसमें नाटक, संगीत, नृत्य और रस सिद्धांत का वैज्ञानिक विवेचन मिलता है।

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