Author: News Editor

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भाषा विज्ञान और हिन्दी साहित्य के चलते-फिरते ज्ञानकोश थे डॉ. रमेशचन्द्र मेहरोत्रा

डॉ. महरोत्रा ने छत्तीसगढ़ी मुहावरों और लोकोक्तियों का एक महत्वपूर्ण संकलन भी तैयार किया। उन्होंने ‘ मानक छत्तीसगढ़ी का सुलभ व्याकरण’ भी लिखा। शब्दों के बारीक से बारीक अर्थ निकालने में उन्हें महारत हासिल थी। भाषाओं में शब्दों का यथायोग्य प्रयोग कैसे किया जाए ,यह उनकी पुस्तकों से सीखा जा सकता है। अपने विद्यार्थियों के लिए वह भाषा विज्ञान और हिन्दी साहित्य के चलते -फिरते विशाल ज्ञानकोश थे।

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प्राचीन छत्तीसगढ़ के रचयिता प्यारेलाल गुप्त की साहित्य साधना

रविशकर वि”वविद्यालय रायपुर से सन् 1973 में प्रकाशित इस ग्रंथ में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग के पूर्व तक का श्रृंखलाबद्ध इतिहास है। इस ग्रंथ में न केवल प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास बल्कि सांस्कृतिक परम्पराओं, लोक कथाओं, पुरातत्व और साहित्य का उल्लेख है। इस ग्रंथ को ‘छत्तीसगढ़ का इनसाइक्लोपीडिया‘ माना जा सकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पदयात्रा करके इस ग्रंथ के लिए सामग्री जुटायी थी।

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एक युग, अनेक भूमिकाएं : हरि ठाकुर

हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं के वह एक ऐसे कवि थे, जिनकी कविताओं में और जिनके गीतों में अन्याय और शोषण की जंजीरों से माटी -महतारी की मुक्ति की बेचैन अभिव्यक्ति मिलती है। वह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, इतिहासकार, पत्रकार, लेखक, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के अग्रणी नेता भी थे।

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक अनसुनी वीरगाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सन् 1857 में रानी अवंतीबाई लोधी को प्रथम महिला वीरांगना के रूप में माना जाता है, जिन्होंने स्वदेश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। 20 मार्च 1858 को रानी अवंतीबाई ने अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।

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भारतीय राजनीति के युगपुरुष : अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक यात्रा 1940 के दशक में शुरू हुई जब वे भारतीय जनसंघ के साथ जुड़े। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया, जिससे उनके राजनीतिक जीवन की नींव पड़ी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, अटल जी ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई और अपने देश के लिए समर्पण का परिचय दिया। उनके नेतृत्व के गुण और भाषण देने की क्षमता ने उन्हें जल्द ही एक महत्वपूर्ण राजनीतिक व्यक्तित्व बना दिया।

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गैंदसिंह थे छत्तीसगढ़ के प्रथम बलिदानी : स्वतंत्रता संग्राम

उत्तर बस्तर (कांकेर ) जिले में चारामा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण शहीद गैंदसिंह के सम्मान में किया गया है,वहीं नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ सरकार का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और महासमुंद जिले का कोडार सिंचाई जलाशय भी शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर है।

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