रोग नहीं, रोगी का उपचार करते थे प्राचीन भारत के वैद्य
प्राचीन भारत के वैद्यों की गौरवशाली चिकित्सा परंपरा, चरक और सुश्रुत का योगदान, रोगी केंद्रित उपचार, आयुर्वेद की वैज्ञानिकता तथा आधुनिक चिकित्सा की सीमाओं पर तथ्यात्मक विशेष आलेख।
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Read Moreरामगढ़ महोत्सव की शोध संगोष्ठी में आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने दण्डकारण्य, दक्षिणापथ, रामगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन नाट्यशाला, शरभंग आश्रम और यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावनाओं पर शोधपरक व्याख्यान दिया।
Read Moreराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर प्रकाशित पुस्तक 100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज का परिचय। इसमें संघ की स्थापना, विचारधारा, पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता और भविष्य के लक्ष्य का विस्तृत विवेचन किया गया है।
Read Moreबाबा नागार्जुन की जयंती पर उनके जीवन, साहित्य-साधना, जनपक्षधर लेखन, प्रसिद्ध कविताओं, उपन्यासों तथा साहित्य अकादमी सम्मान सहित उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर आधारित विशेष आलेख।
Read Moreसरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बढ़ती बुके संस्कृति के आर्थिक एवं पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का विश्लेषण तथा भारतीय स्वागत परंपराओं जैसे पौधा, पुस्तक, श्रीफल और अंगवस्त्र को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर केंद्रित संपादकीय।
Read Moreसंत कबीर की लोकभाषा, निर्गुण भक्ति, सामाजिक चेतना, जाति-विरोध, पाखंड-भंजन, लोकमंगल और कालजयी दोहों का विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन।
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