राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोप लगाने वाले नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग
विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को लिखा पत्र, कहा आरोपों का तथ्यात्मक आधार, सूचना का स्रोत और साक्ष्य सामने लाए जाएं
नई दिल्ली, 5 जुलाई। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाने वाले राजनीतिक नेताओं और अन्य व्यक्तियों के बयान दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए आरोप लगाने वालों से उनके दावों का तथ्यात्मक आधार, सूचना का स्रोत और आरोपों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज मांगे जाने चाहिए।
आलोक कुमार ने 4 जुलाई 2026 को अयोध्या के डीएसपी और थाना राम जन्मभूमि में दर्ज एफआईआर संख्या 0090/2026 के विवेचना अधिकारी आशुतोष तिवारी को भेजे पत्र में कहा है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर विभिन्न सार्वजनिक व्यक्तियों ने टेलीविजन चैनलों, सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पत्र में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के सार्वजनिक बयानों का उल्लेख किया गया है।
आलोक कुमार ने पत्र में कहा कि प्रो. रामगोपाल यादव ने राम मंदिर में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। पत्र के अनुसार उन्होंने देश विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने, चांदी, हीरे के हार और करोड़ों रुपये की नकदी गायब होने की बात भी कही है। साथ ही कथित चोरी में छोटे कर्मचारियों के अलावा बड़े और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता का आरोप लगाया गया है।
पत्र में अरविंद केजरीवाल के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्होंने भगवान राम के हार, चरण पादुकाओं, हीरे, आभूषणों, चांदी की ईंटों, दीपकों और नकद राशि की कथित चोरी के आरोप लगाए हैं। पत्र के अनुसार उन्होंने 200 करोड़ रुपये की नकदी और हीरे जवाहरात चोरी होने का दावा किया तथा पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
सांसद संजय सिंह के संबंध में पत्र में कहा गया है कि उन्होंने सार्वजनिक मंच से 200 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी और 50 से अधिक कर्मचारियों की कथित संलिप्तता की बात कही थी। हालांकि पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संजय सिंह कथित रूप से एसआईटी के समक्ष उपस्थित होकर भूमि खरीद से संबंधित आरोपों के संदर्भ में कुछ दस्तावेज प्रस्तुत कर चुके हैं। इसलिए पत्र में उनके बयान के उस हिस्से को अलग रखा गया है।
प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान का उल्लेख करते हुए आलोक कुमार ने कहा कि उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले सीसीटीवी कैमरे बंद करके हजारों करोड़ रुपये के चढ़ावे की हेराफेरी कर सकते हैं या इसके पीछे बड़े लोगों की मिलीभगत है।
आलोक कुमार ने जांच अधिकारी से कहा है कि इन सार्वजनिक आरोपों में निश्चित धनराशियों और चोरी की कथित वस्तुओं का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि आरोप लगाने वाले व्यक्तियों के पास मामले से संबंधित कुछ तथ्य, जानकारी या सामग्री हो सकती है। इसलिए कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कर उनके बयान दर्ज किए जाने चाहिए।
उन्होंने मांग की कि जांच एजेंसी आरोप लगाने वाले व्यक्तियों से तीन प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी प्राप्त करे। पहला, आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है। दूसरा, उनकी सूचना का स्रोत कौन सा है। तीसरा, आरोपों के समर्थन में उनके पास कौन से दस्तावेज अथवा अन्य सामग्री उपलब्ध है।
पत्र में कहा गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति अपने आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री प्रस्तुत करते हैं तो इससे जांच एजेंसी को सत्य तक पहुंचने में सहायता मिलेगी। वहीं यदि जांच में यह सामने आता है कि इतने गंभीर सार्वजनिक आरोप बिना किसी तथ्यात्मक आधार या सहायक सामग्री के लगाए गए हैं, तो इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
आलोक कुमार ने कहा कि यदि आरोप जानबूझकर झूठे अथवा बिना किसी प्रमाण के लापरवाहीपूर्वक लगाए गए पाए जाते हैं तो जांच एजेंसी कानून के अनुसार कार्रवाई पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आधारहीन आरोपों को अनुमति नहीं दी जा सकती जिनसे समाज में घृणा, दुर्भावना या शत्रुता की भावना पैदा हो।
पत्र के अंत में वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा है कि आरोपों के समर्थन में प्रमाण मिलने पर जांच को आगे बढ़ाया जाना चाहिए और यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं तो कानून को अपना काम करना चाहिए।

