साहित्यिक कुंभ में रायगढ़ के साहित्यकार बसंत राघव को मिलेगा सारस्वत सम्मान
बिलासपुर, 14 मई 2026। छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य के युग प्रवर्तक माने जाने वाले स्वर्गीय डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की स्मृति में 17 मई 2026, रविवार को बिलासपुर में एक दिवसीय भव्य साहित्यिक आयोजन आयोजित किया जाएगा। समन्वय साहित्य परिवार छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न होगा, जिसमें साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण, स्मरणांजलि सभा, विमर्श, विशिष्ट सम्मान तथा समन्वय रत्न अलंकरण प्रदान किए जाएंगे।
यह आयोजन डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की 98वीं जयंती के उपरांत उनकी साहित्य साधना और छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए समर्पित किया गया है। कार्यक्रम बिलासपुर स्थित प्रार्थना भवन, जल संसाधन विभाग परिसर, आईजी कार्यालय के समीप दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगा।
प्रथम सत्र में होगा कृतियों का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विभिन्न साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण और सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा होंगे। अध्यक्षता पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के साहित्य एवं भाषा अध्ययन शाला के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. चित्तरंजन कर करेंगे।
विशिष्ट अतिथियों के रूप में पाणिनीय शोध संस्थान, बिलासपुर की अध्यक्ष आचार्या डॉ. पुष्पा दीक्षित, इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के संगीत एवं कला संकाय के अधिष्ठाता डॉ. राजन यादव, छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा, पूर्व विधायक एवं समाजसेवी चंद्रप्रकाश बाजपेयी तथा प्रख्यात नवगीतकार डॉ. अजय पाठक उपस्थित रहेंगे।
इस अवसर पर सर्वप्रिय प्रकाशन, दिल्ली द्वारा प्रकाशित डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की चर्चित कृतियाँ ‘छत्तीसगढ़ का इतिहास और परंपरा’ तथा ‘गुड़ी के गोठ’ का लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही डॉ. देवधर महंत द्वारा संपादित ‘कीर्तिशेष डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा’, सरला शर्मा की कृति ‘रात जागा पाखी उवाच’ और डॉ. बरसाइतदास महंत की पुस्तक ‘महाभारत काल में नारी’ का भी विमोचन होगा।
साहित्यिक अवदान पर होगा विमर्श
द्वितीय सत्र में डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान पर केंद्रित स्मरणांजलि एवं विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न साहित्यकार और विद्वान उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार रखेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को मिलेगा सम्मान
कार्यक्रम में साहित्य, समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकारों एवं समाजसेवियों को विभिन्न सम्मान और अलंकरण प्रदान किए जाएंगे।
आत्मीय सारस्वत सम्मान
श्री बजरंग केडिया, डॉ. जयश्री शुक्ला, सिद्धेश्वर पाटनवार, डॉ. जी.बी. सिंह, डॉ. गिरधर शर्मा, रायगढ़ के साहित्यकार बसंत राघव, स्मृतिशेष प्रेमशंकर पाटनवार परिवार, स्मृतिशेष सुभाष वर्मा परिवार तथा कवि राजेश चौहान को आत्मीय सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
विशिष्ट सम्मान एवं अलंकरण
- डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा स्मृति छत्तीसगढ़ी गद्य सम्मान : विजय मिश्रा ‘अमित’, रायपुर
- डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा स्मृति सामाजिक जागरण सम्मान : महेन्द्र जैन, प्रदेशाध्यक्ष, वंदे मातरम् मित्र मंडल, बिलासपुर
- कृष्णा शर्मा स्मृति नारी शक्ति सम्मान : डॉ. उषाकिरण वाजपेयी, बिलासपुर
- पं. लक्ष्मीनारायण शर्मा ‘साधक’ स्मृति काव्य सम्मान : दिनेश कुमार चतुर्वेदी, जांजगीर
इसके अतिरिक्त डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा स्मृति समन्वय रत्न अलंकरण सरला शर्मा, शशि दुबे, डॉ. बेला महंत, सुश्री श्रुति प्रभाला, ब्रजेश श्रीवास्तव और किशोर सेतपाल को साहित्यिक, सामाजिक एवं कलात्मक योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन विजय मिश्रा ‘अमित’, किशोर तिवारी और महेश श्रीवास करेंगे। समन्वय साहित्य परिवार छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. देवधर महंत, बिलासपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ. गंगाधर पटेल ‘पुष्कर’ तथा कार्यक्रम संयोजक अनन्य शर्मा ने साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों और प्रबुद्ध नागरिकों से कार्यक्रम में सहभागी बनने की अपील की है।
आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल स्मरणांजलि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, साहित्यिक परंपरा और भाषाई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

