बीजापुर के 224 गांवों में विकास की नई कहानी: रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं से बदली तस्वीर
कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास से दूर रहे बीजापुर जिले के कई गांव अब तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। शासन की नियद नेल्लानार योजना, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के संयुक्त प्रयासों से अंदरूनी क्षेत्रों में रोजगार, पक्के मकान, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के नए अवसर पहुंच रहे हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में 42 सुरक्षा कैंपों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को इस अभियान से जोड़ा गया है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन इलाकों में अब विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ी है और ग्रामीणों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
16 हजार से ज्यादा परिवारों को रोजगार का सहारा
इन गांवों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें 7,271 नए जॉब कार्ड शामिल हैं। इससे हजारों परिवारों को गांव में ही काम मिलने लगा है।
विशेष रूप से प्रभावित परिवारों को भी योजना से जोड़ा गया है। इनमें 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक पीड़ित परिवारों को रोजगार से जोड़ने के लिए जॉब कार्ड दिए गए हैं।
5 लाख मानव दिवस का सृजन
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत इन क्षेत्रों में अब तक 1,744 विकास कार्य पूरे किए गए हैं। इन कार्यों से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं। इससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिला है और पलायन में कमी आई है।
आजीविका डबरी से बढ़ेगी आमदनी
ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए 372 आजीविका डबरी स्वीकृत की गई हैं। इन डबरियों के माध्यम से मछली पालन, सब्जी उत्पादन और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भैरमगढ़ क्षेत्र के बेलनार गांव में, जहां कभी लोग भय के कारण गांव छोड़ चुके थे, अब ग्रामीण लौट आए हैं और रोजगार से जुड़ रहे हैं। यहां कई हितग्राहियों के लिए डबरी निर्माण पूरा हो चुका है।
2977 परिवारों को आवास स्वीकृत
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत क्षेत्र में 2,977 परिवारों को पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 690 घर बनकर तैयार हो चुके हैं। इन आवासों ने लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार दिया है।
गांवों में दिख रहा बदलाव
बीजापुर के दुगाली गांव में मनरेगा से बना कुआं अब 100 से अधिक लोगों के लिए राहत का स्रोत बन गया है। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण जहां बोरिंग संभव नहीं थी, वहां यह स्थायी जलस्रोत साबित हुआ है।
पालनार गांव में पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान जैसे निर्माण कार्य जारी हैं, जिनमें 200 से अधिक श्रमिक काम कर रहे हैं।
कावड़गांव में सभी ग्रामीण श्रमिकों को जॉब कार्ड दिए जा चुके हैं। गांव में अब सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी सुविधाएं भी पहुंच चुकी हैं।
सावनार और पुसुकोण्टा में नए आंगनबाड़ी भवन बनने से बच्चों को शिक्षा और पोषण के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। वहीं धरमारम, तोड़का और बांगोली जैसे गांवों में राशन दुकानों के खुलने से लोगों को दूर-दराज नहीं जाना पड़ रहा।
युवाओं को कौशल प्रशिक्षण
स्थानीय युवाओं और पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजमिस्त्री प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे उन्हें निर्माण कार्यों में रोजगार मिल रहा है और नई शुरुआत का मौका भी।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन गांवों तक कभी विकास नहीं पहुंच पाया था, वहां अब नई उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक रोजगार, आवास, शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि विकास, जनभागीदारी और संवेदनशील नीतियों के जरिए सबसे कठिन क्षेत्रों में भी स्थायी शांति और समृद्धि लाई जा सकती है।

