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इस्लामाबाद वार्ता से पहले ही हालात बिगड़े, हॉर्मुज़ विवाद बना बड़ी चुनौती

ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता के बीच तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर बातचीत विफल होती है तो ईरान पर हमले फिर तेज किए जा सकते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी युद्धपोत फिर से तैयार किए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई जारी रहेगी।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान को बातचीत का अवसर दिया जा रहा है, लेकिन अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस्लामाबाद दौरे के दौरान भी यही संकेत मिले कि अमेरिका वार्ता को लेकर सकारात्मक है, लेकिन ईरान को ईमानदारी से बातचीत करनी होगी।

इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा, लेकिन माहौल तनावपूर्ण
वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शहर के कई प्रमुख मार्ग बंद कर दिए गए हैं और दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। हालांकि, जमीन पर हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं।

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सीजफायर पर संकट के बादल
दो सप्ताह के लिए घोषित युद्धविराम 48 घंटे के भीतर ही कमजोर पड़ता दिख रहा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित कर दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कई जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा है, जिससे समुद्री व्यापार पर भी दबाव बढ़ा है।

अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया
ईरान के इस कदम पर अमेरिका ने नाराजगी जताई है। ट्रंप ने इसे समझौते का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे अनुचित कदम करार दिया। इससे पहले भी उन्होंने चेतावनी दी थी कि हालात बिगड़े तो बड़े स्तर पर तबाही हो सकती है।

मध्यस्थता पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इजरायल ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर संदेह जताया है, जिससे कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।

तेहरान में चिंता का माहौल
ईरान की राजधानी तेहरान में लोग मौजूदा हालात को लेकर चिंतित हैं। एक ओर लोग हमलों के रुकने से राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें डर है कि यह शांति अस्थायी हो सकती है और जल्द ही संघर्ष फिर भड़क सकता है।

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कुल मिलाकर, क्षेत्र में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों में वार्ता का परिणाम ही तय करेगा कि हालात सामान्य होंगे या तनाव और बढ़ेगा।