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हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव: अस्थायी युद्धविराम से पीछे हटा ईरान, डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनी के बीच 45 दिन के सीजफायर प्रस्ताव पर अनिश्चितता

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति और अधिक गंभीर होती दिख रही है। सोमवार को ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट संकेत दिया कि देश “अस्थायी युद्धविराम” के बदले इस रणनीतिक मार्ग को खोलने के लिए तैयार नहीं है। अधिकारी ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वॉशिंगटन में “स्थायी युद्धविराम के लिए आवश्यक गंभीरता और तैयारी की कमी” है।

हालांकि, ईरान ने यह भी पुष्टि की है कि पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए युद्धविराम प्रस्ताव को उसने प्राप्त कर लिया है और उस पर विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य 45 दिनों के लिए संघर्ष विराम लागू कर बातचीत का रास्ता खोलना है।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने विवादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की मांग की और संकेत दिया कि अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई के संभावित लक्ष्य तय किए जा रहे हैं।

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ट्रंप ने अपने पोस्ट में “ब्रिज डे” और “पावर प्लांट डे” जैसे शब्दों का जिक्र करते हुए ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर हमले की संभावना जताई। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

एक अन्य घटनाक्रम में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की कि वह सोमवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से मीडिया को संबोधित करेंगे। यह बयान उस सैन्य अभियान के बाद आया जिसमें ईरान द्वारा गिराए गए अमेरिकी विमान के दो पायलटों को सुरक्षित निकाला गया।

युद्धविराम का प्रस्ताव क्या है?
मध्य-पूर्व के दो अधिकारियों के अनुसार, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की की मध्यस्थता में एक ड्राफ्ट प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें 45 दिन का युद्धविराम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात शामिल है, ताकि स्थायी समाधान के लिए बातचीत शुरू की जा सके।

यह प्रस्ताव ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया है, लेकिन अब तक दोनों पक्षों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्ताव पर सहमति बनना आसान नहीं होगा। ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह तब तक संघर्ष जारी रखेगा जब तक उसे आर्थिक क्षतिपूर्ति और भविष्य में हमलों से सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं मिलती।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, पर जारी गतिरोध का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति वैश्विक राजनीति के लिए बेहद अहम बनी रहेगी।