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बस्तर के विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की कार्ययोजना तैयार, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में बसे 31 हजार से अधिक लोगों की होगी घर वापसी

रायपुर, 02 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग से विस्थापित होकर तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास कर रहे परिवारों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार द्वारा विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मंत्रालय महानदी भवन में अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में पुनर्वास के लिए गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई, जिसमें विस्थापित परिवारों को पुनः मूल स्थान पर बसाने की प्रक्रिया को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में जानकारी दी गई कि बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों से बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कारणों से पड़ोसी राज्य तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश के गांवों में जाकर बस गए हैं। इन प्रवासित परिवारों की ओर से राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसके आधार पर आयोग ने एक माह के भीतर सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

निर्देशों के पालन में बस्तर संभागायुक्त द्वारा समयबद्ध कार्यक्रम तैयार कर कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर को प्रवासित परिवारों का सर्वे कर 15 दिनों के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि सर्वेक्षण के अनुसार जिला दंतेवाड़ा के 60 ग्रामों के 618 परिवारों के 2654 लोग तेलंगाना राज्य में निवासरत हैं। इसी प्रकार सुकमा जिले के 293 ग्रामों से 2733 परिवारों के 12026 लोग तथा बीजापुर जिले के 114 ग्रामों से 994 परिवारों के 5029 लोग तेलंगाना के विभिन्न गांवों में प्रवासित हैं। इस प्रकार छत्तीसगढ़ के इन तीन जिलों के कुल 467 ग्रामों से 4345 परिवारों के 19709 लोग तेलंगाना राज्य में निवास कर रहे हैं।

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इसी तरह आंध्रप्रदेश राज्य में दंतेवाड़ा जिले के 25 ग्रामों से 125 परिवारों के 568 लोग, सुकमा जिले के 155 ग्रामों से 2462 परिवारों के 10787 लोग तथा बीजापुर जिले के 4 ग्रामों से 7 परिवारों के 34 लोग प्रवासित पाए गए हैं। इस प्रकार आंध्रप्रदेश के 184 ग्रामों में कुल 2594 परिवारों के 11389 लोग निवासरत हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के 667 ग्रामों से तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के 651 ग्रामों में कुल 6939 परिवारों के 31098 लोग प्रवासित हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभागायुक्त डोमन सिंह तथा पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज से चर्चा कर सीमावर्ती राज्यों में निवास कर रहे परिवारों की अद्यतन जानकारी एकत्र करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में प्रवासित परिवारों के संबंध में संबंधित राज्य सरकारों के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर विस्तृत जानकारी प्राप्त की जाए, जिससे पुनर्वास की कार्ययोजना अधिक प्रभावी ढंग से तैयार की जा सके।

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अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य राज्यों में प्रवासित लोगों के मूल ग्राम, वर्तमान निवास स्थान तथा अन्य आवश्यक विवरण तैयार करें, ताकि पुनर्वास योजना को सुव्यवस्थित रूप से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा शीघ्र नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, जिससे विभागीय समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना को तेजी से लागू किया जा सके।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, पुलिस महानिरीक्षक बस्तर सुन्दरराज तथा बस्तर संभागायुक्त डोमन सिंह सहित दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टर शामिल हुए।

इसके अतिरिक्त सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग, राजस्व विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, रोजगार विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

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राज्य सरकार द्वारा तैयार की जा रही यह कार्ययोजना बस्तर क्षेत्र के विस्थापित परिवारों को सुरक्षित वातावरण में पुनः बसाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न केवल प्रभावित परिवारों को अपने मूल सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में लौटने का अवसर मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के संतुलित विकास और सामाजिक स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।