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मथुरा की 5000 वर्ष पुरानी लट्ठमार और लड्डू होली की छवि बिगाड़ने की कोशिश, सात यूट्यूबर्स समेत कई लोगों पर FIR दर्ज

मथुरा। ब्रज की विश्वप्रसिद्ध और लगभग 5000 वर्ष पुरानी लट्ठमार तथा लड्डू होली की छवि खराब करने के आरोप में मथुरा पुलिस ने सात यूट्यूबर्स समेत कुल नौ सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि इन लोगों ने बरसाना और नंदगांव की होली से जुड़े पुराने एवं एडिटेड वीडियो को वर्तमान आयोजन बताकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिससे सांस्कृतिक परंपरा को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया।

पुलिस जांच में सामने आया कि वायरल किए गए वीडियो हालिया आयोजन के नहीं थे, बल्कि पूर्व वर्षों के फुटेज को संपादित कर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया। इससे क्षेत्र में भ्रम की स्थिति बनी और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हुई। इसके बाद बरसाना थाने में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

इन यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज हुआ मामला

मथुरा पुलिस द्वारा जिन सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • Kavish Aziz (@azizkavish)

  • iMayankofficial (@imayankindian)

  • Piyush Rai (@Benarasiyaa)

  • Vishal JyotiDev Agarwal (@JyotiDevSpeaks)

  • Uday Roy / Extra2ab (@UdayRoy443477)

  • Mamta Rajgadh (@rajgarh_mamta)

  • Prayagraj.vibes

  • r_nagar_vlogs

  • kotafoodexplorerr

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इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक वीडियो साझा कर ब्रज की पारंपरिक होली को लेकर गलत नैरेटिव फैलाने की कोशिश की।

सांस्कृतिक विरासत को धूमिल करने का आरोप

पुलिस अधिकारियों के अनुसार लट्ठमार और लड्डू होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी ब्रज की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा है। सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में वीडियो प्रसारित होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश उत्पन्न हुआ और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अनावश्यक भय का वातावरण बनने लगा।

मथुरा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ब्रज क्षेत्र में होली उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित हो रहा है तथा अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

पुलिस की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर भ्रामक सामग्री फैलाना दंडनीय अपराध है और भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

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