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बस्तर में शांति की ऐतिहासिक पहल: दंतेवाड़ा में 63 माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

रायपुर, 9 जनवरी 2026/ बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। दंतेवाड़ा जिले में ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों ने हिंसा का मार्ग छोड़ते हुए लोकतांत्रिक और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं। यह केवल आत्मसमर्पण की घटना नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य की दिशा में एक निर्णायक बदलाव माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि बंदूक नहीं, बल्कि संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का प्रभावी विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों तक अब सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका के अवसर और सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था प्रदान की जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।

उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय की नहीं, बल्कि भविष्य की भूमि बन रहा है, जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की मजबूत नींव रख रहे हैं। यह परिवर्तन न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए नई उम्मीद और विश्वास का संदेश है।