एनसीईआरटी मानकों के अनुरूप ही होगा पाठ्यपुस्तकों का मुद्रण
रायपुर, 2 जनवरी 2025/ छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने शिक्षा सत्र 2026–27 के लिए पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण को लेकर उठाए जा रहे प्रश्नों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी निर्णय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, एनसीईआरटी के मानकों तथा राज्य शासन एवं एससीईआरटी के निर्देशों के अनुरूप लिए गए हैं।
निगम ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी आधारित है और एनसीईआरटी नई दिल्ली तथा एससीईआरटी रायपुर के बीच 15 अक्टूबर 2025 को हुए अनुबंध के अनुसार आंतरिक पृष्ठों के लिए 80 जीएसएम टेक्स्ट पेपर तथा 220 जीएसएम कवर पेपर का उपयोग अनिवार्य है। इसी अनुबंध में यह भी स्पष्ट है कि पाठ्यपुस्तकों की प्रिंट क्वालिटी, दीर्घकालिक स्थायित्व और पठनीयता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी कारण कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकों के लिए 80 जीएसएम और कक्षा 9 एवं 10 के लिए 70 जीएसएम कागज का उपयोग किया जा रहा है। यह निर्णय किसी एक स्तर पर नहीं, बल्कि अनुबंधीय प्रावधानों और शैक्षणिक मानकों के पालन में लिया गया है।
निगम के अधिकारियों ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा 1 से 8 तक विषयों की संख्या बढ़ाई गई है। पूर्व सत्र में जहां 134 विषयों की पुस्तकें मुद्रित की गई थीं, वहीं शिक्षा सत्र 2026–27 में 144 विषयों की पुस्तकों का मुद्रण प्रस्तावित है। कक्षा 4 और कक्षा 7 में विषयों की वृद्धि शासन एवं एससीईआरटी के निर्णय के अनुसार की गई है। विषयों की संख्या बढ़ने से कागज की आवश्यकता में स्वाभाविक वृद्धि हुई है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह योजनाबद्ध और अनुमोदित है।
निगम ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025–26 में लगभग 2 करोड़ 65 लाख निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण के लिए लगभग 11,000 मीट्रिक टन कागज का वास्तविक उपयोग किया गया था। आगामी शिक्षा सत्र 2026–27 के लिए भी लगभग इतनी ही मात्रा में कागज की आवश्यकता का अनुमान है। अतः कागज की असामान्य वृद्धि से जुड़े आकलन तथ्यपरक नहीं हैं।
छात्रों के बस्ते का वजन 14 प्रतिशत बढ़ने के दावों को खारिज करते हुए निगम ने कहा कि केवल कागज के जीएसएम के आधार पर बस्ते के वजन में वृद्धि का निष्कर्ष निकालना भ्रामक है। बस्ते का वजन विषयों की संख्या, पुस्तकों के पृष्ठों और पाठ्यक्रम की संरचना पर निर्भर करता है। कई कक्षाओं में डिजिटल शिक्षण सामग्री, चरणबद्ध वितरण प्रणाली और अन्य शैक्षणिक उपायों से बस्ते के वजन को नियंत्रित रखा जा रहा है।
निगम ने यह भी बताया कि पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निविदा प्रक्रिया में कठोर शर्तें लागू हैं। निविदाकर्ताओं से कागज मिलों के लिए जीएसटी विभाग के अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट तथा न्यूनतम 42,000 मीट्रिक टन प्रिंटिंग पेपर की आपूर्ति का अनुभव प्रमाणित करना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल अनुभवी और सक्षम कंपनियां ही आपूर्ति में शामिल हों।
निगम ने दोहराया कि शिक्षा सत्र 2026–27 के लिए कागज क्रय और मुद्रण की समस्त कार्यवाही निगम की कार्यकारिणी की स्वीकृति के बाद ही की जा रही है, जिसमें वित्त विभाग, आदिवासी विकास विभाग, लोक शिक्षा, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी तथा शासकीय मुद्रणालय के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि कागज, वजन और व्यय को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें और आधिकारिक तथ्यों पर भरोसा रखें। निगम ने कहा कि विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है और नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार संचालित की जा रही है।
