छत्तीसगढ़ी चेतना के संवाहक: डॉ. खूबचंद बघेल
डॉ. खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक चेतना के पुरोधा थे, जिन्होंने राजनीतिक सिद्धांतों और क्षेत्रीय स्वाभिमान के लिए जीवनभर संघर्ष किया।
Read Moreडॉ. खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक चेतना के पुरोधा थे, जिन्होंने राजनीतिक सिद्धांतों और क्षेत्रीय स्वाभिमान के लिए जीवनभर संघर्ष किया।
Read More1857 की क्रांति के दौरान कानपुर और बिठूर में जनरल हैवलॉक और नील द्वारा किए गए नरसंहार की क्रूर गाथा, जब हज़ारों निर्दोष भारतीयों को मौत के घाट उतारा गया और गांव के गांव जला दिए गए।
Read Moreलक्ष्मीबाई केलकर, राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और नारी जागरण की अग्रदूत थीं। उन्होंने स्त्रियों को सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र सेवा में संगठित कर भारत के उत्थान में अमूल्य योगदान दिया। यह लेख उनके जीवन, कार्य और विचारधारा पर विस्तृत प्रकाश डालता है।
Read Moreस्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की रक्षा के लिये भारत में असंख्य बलिदान हुए हैं, तब जाकर हमने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता का सूर्योदय देखा। इन बलिदानों में रानी लक्ष्मीबाई का अनूठा बलिदान भी है, जिन्होंने अपनी अंतिम श्वास तक संघर्ष किया।
Read More13 जून 1923 को डाबी में अंग्रेजों की गोली से शहीद हुए नानक भील ने किसान शोषण के खिलाफ आंदोलन चलाया और वनवासी समाज को जागरूक किया।
Read Moreयह आलेख अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उनके क्रांतिकारी जीवन, साहित्यिक योगदान और शहादत की स्मृति को समर्पित है।
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