हिन्दी साहित्य

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जब बाबा ने मेरे कान उमेंठे

सन् 1968 में जांजगीर में आयोजित उस ऐतिहासिक काव्य गोष्ठी का संस्मरण, जब यायावर कवि बाबा नागार्जुन ने अपने सहज स्वभाव, स्पष्टवादिता और कालजयी कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था।

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साहित्य, देशभक्ति और प्रकृति-प्रेम की प्रेरणा त्रयी : राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त

महाकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर जानिए उनके जीवन, राष्ट्रप्रेम, साहित्यिक योगदान और कालजयी रचनाओं ‘भारत-भारती’, ‘साकेत’ व ‘पंचवटी’ की भावगंध।

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साहित्य-साधना के एकांत तपस्वी : शिवशंकर पटनायक

वरिष्ठ साहित्यकार शिवशंकर पटनायक, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के पिथौरा में रहकर हिन्दी गद्य साहित्य को समर्पित जीवन जिया, अब भी कलम से ही रचते हैं उपन्यास और कहानियाँ।

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futuredहमारे नायक

सिर्फ़ तीस साल की उम्र में शहीद हो गए रामप्रसाद आज महान योद्धा, अमर शहीद की जयंती

यह आलेख अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उनके क्रांतिकारी जीवन, साहित्यिक योगदान और शहादत की स्मृति को समर्पित है।

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futuredसमाज

हिन्दी साहित्य में व्यंग्य विधा के संस्थापक हरिशंकर परसाई

उनकी लोकप्रिय व्यंग्य रचनाओं में ‘सदाचार का ताबीज’,और ‘इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा ‘रानी नागफनी की कहानी’ उनका बहुचर्चित व्यंग्य उपन्यास है। वह हमेशा साम्प्रदायिकता के ख़िलाफ़ रहे। धार्मिक और जातीय संकीर्णताओं का उन्होंने अपनी व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से हमेशा विरोध किया। वह अपनी कलम से साम्प्रदायिक शक्तियों का पर्दाफ़ाश भी करते रहे।

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